चम्मच और लार से बीमारियों की पहचान? जानिए इस सोशल मीडिया वायरल टेस्ट की असली सच्चाई!

Delhi News: आजकल के खराब खानपान और भागदौड़ भरी जीवनशैली के कारण लोग तेजी से विभिन्न बीमारियों की चपेट में आ रहे हैं। इन गंभीर बीमारियों का सही समय पर पता लगाने के लिए लोग अक्सर अस्पतालों में महंगे और जटिल मेडिकल टेस्ट करवाते हैं। कई बार लोग अत्यधिक व्यस्तता या लापरवाही के चलते इन जरूरी टेस्ट्स के लिए समय नहीं निकाल पाते हैं और बीमारी बढ़ती चली जाती है।

इसी बीच इंटरनेट और सोशल मीडिया पर एक बेहद आसान घरेलू तरीका तेजी से वायरल हो रहा है। दावा किया जा रहा है कि बिना किसी लैब टेस्ट या डॉक्टर के पास जाए, आप घर बैठे ही सिर्फ एक चम्मच की मदद से अपनी गंभीर से गंभीर बीमारियों का पता लगा सकते हैं। इस दावे के पीछे एक विदेशी यूनिवर्सिटी की रिसर्च और कथित मेडिकल जर्नलिस्ट का हवाला भी दिया जा रहा है।

जानिए क्या है सोशल मीडिया पर वायरल ‘स्पून टेस्ट’ का दावा

इंटरनेट पर वायरल इस विधि के अनुसार, आपको एक साफ स्टील की चम्मच लेनी होती है। इसके बाद चम्मच की उभरी हुई सतह को अपनी जीभ पर रखकर धीरे-धीरे तब तक रगड़ना होता है, जब तक कि उस पर आपके मुंह की लार यानी सलाइवा अच्छी तरह न लग जाए। इसके तुरंत बाद चम्मच को एक साफ प्लास्टिक की पारदर्शी थैली (पॉलिथीन) के अंदर बंद कर दिया जाता है।

इस थैली को दो से तीन मिनट के लिए किसी तेज रोशनी वाले बल्ब या सूरज की धूप के सामने रखने के लिए कहा जाता है। दावे के मुताबिक, यदि इस पॉलिथीन को खोलने पर उससे मीठी गंध आती है, तो व्यक्ति को शुगर या डायबिटीज की बीमारी हो सकती है। लोग इस भ्रामक जानकारी को बिना सोचे-समझे सच मानकर धड़ल्ले से शेयर कर रहे हैं।

दावों के अनुसार चम्मच के बदलते रंग बताते हैं ये बीमारियां

इस भ्रामक दावे में आगे कहा गया है कि दो मिनट बाद यदि चम्मच पर जमा लार का रंग हल्का पीला दिखाई देता है, तो यह सीधे तौर पर थायराइड की बीमारी का बड़ा संकेत है। वहीं, अगर चम्मच का रंग बदलकर हल्का बैंगनी हो जाता है, तो इसे शरीर में खराब कोलेस्ट्रॉल की अधिकता और धीमे ब्लड सर्कुलेशन यानी खराब रक्त संचार की समस्या से जोड़ा जाता है।

इसके अलावा, यदि चम्मच पर सफेद रंग की परत दिखाई दे, तो इसे शरीर में मौजूद किसी बड़े बैक्टीरियल या वायरल संक्रमण का लक्षण बताया जाता है। चम्मच का रंग हल्का नारंगी होने पर दावा किया जाता है कि पीड़ित व्यक्ति की किडनी या गुर्दे सही तरीके से काम नहीं कर रहे हैं। इन अजीबोगरीब दावों ने कई आम लोगों को भारी असमंजस में डाल दिया है।

सच्चाई: किसी भी वैज्ञानिक या चिकित्सा अनुसंधान में नहीं मिला है प्रमाण

एक जिम्मेदार और विश्वसनीय समाचार संपादक के नाते, हम आपको आगाह करना चाहते हैं कि यह पूरा दावा वैज्ञानिक और चिकित्सा दृष्टिकोण से पूरी तरह भ्रामक और गलत है। आधुनिक चिकित्सा विज्ञान (Medical Science) में ‘स्पून टेस्ट’ जैसी किसी भी विधि का कोई वजूद नहीं है। जीभ पर चम्मच रगड़ने से या लार का रंग बदलने से कभी भी थायराइड, किडनी या कोलेस्ट्रॉल जैसी बीमारियों का सटीक पता नहीं लगाया जा सकता।

मुंह में मौजूद लार का रंग और गंध हमारे द्वारा खाए गए भोजन, ओरल हाइजीन (दांतों की सफाई) और मुंह में मौजूद सामान्य बैक्टीरिया पर निर्भर करते हैं। यदि आप किसी भी बीमारी के लक्षणों से जूझ रहे हैं, तो इंटरनेट के ऐसे किसी भी फर्जी नुस्खे पर भरोसा करने की भारी भूल बिल्कुल न करें। सेहत में कोई भी गड़बड़ी दिखने पर हमेशा तुरंत प्रमाणित डॉक्टर के पास जाएं और लैब में ब्लड टेस्ट करवाकर ही सही इलाज शुरू करें।

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