New Delhi: भारत की ऊर्जा सुरक्षा को जल्द ही एक अभूतपूर्व और बड़ी मजबूती मिलने वाली है। संयुक्त अरब अमीरात (UAE) की दिग्गज सरकारी तेल कंपनी अबू धाबी नेशनल ऑयल कंपनी (ADNOC) ने भारत में अपने कच्चे तेल के रणनीतिक भंडारण को भारी मात्रा में बढ़ाने पर अंतिम सहमति दे दी है। इस ऐतिहासिक और रणनीतिक कदम से भारत का वर्तमान रणनीतिक तेल भंडार करीब 70 प्रतिशत तक बढ़ जाएगा। इससे भविष्य में किसी भी वैश्विक संकट या युद्ध की स्थिति में देश में ईंधन की निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित की जा सकेगी।
रणनीतिक भंडार में होगी 40 लाख टन की बढ़ोतरी
मौजूदा समय में भारत के पास लगभग 5.3 मिलियन टन का रणनीतिक पेट्रोलियम रिजर्व सुरक्षित है। यह महत्वपूर्ण रिजर्व देश के तीन प्रमुख तटीय शहरों विशाखापत्तनम, मैंगलोर और पादुर में भूमिगत रूप से मौजूद है। अब नई योजना के तहत ADNOC भारत में अपने स्टोरेज को बढ़ाकर सीधे 30 मिलियन बैरल तक करने की व्यापक तैयारी में जुट गया है। तेल क्षेत्र के विशेषज्ञों के अनुसार, यूएई के इस कदम से भारत के कुल रणनीतिक भंडार में 40 लाख टन से ज्यादा अतिरिक्त कच्चा तेल आसानी से जुड़ जाएगा।
पीएम मोदी और यूएई के राष्ट्रपति की मौजूदगी में हुआ समझौता
हाल ही में यूएई के राष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान और भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की विशेष मौजूदगी में ADNOC और भारतीय शीर्ष तेल कंपनियों के बीच कई बड़े रणनीतिक समझौतों पर हस्ताक्षर किए गए। इन द्विपक्षीय समझौतों का मुख्य मकसद भारत और यूएई के बीच सदियों पुरानी ऊर्जा साझेदारी को एक नई और आधुनिक ऊंचाई पर ले जाना है। फिलहाल यूएई की इस सरकारी कंपनी के पास कर्नाटक के मैंगलोर में स्टोरेज सुविधा उपलब्ध है, जहां करीब 60 लाख बैरल कच्चा तेल सुरक्षित रखा जाता है।
वैश्विक तनाव के बीच भारत का बड़ा सुरक्षा चक्र
यह महत्वपूर्ण ऊर्जा समझौता एक ऐसे समय में हुआ है जब पश्चिम एशिया में जारी भीषण तनाव और युद्ध के कारण दुनिया भर में ऊर्जा सप्लाई चेन को लेकर गंभीर चिंताएं बनी हुई हैं। ऐसे अनिश्चित हालातों में भारत सरकार अपने राष्ट्रीय तेल भंडार को चाक-चौबंद करने की दिशा में बेहद आक्रामक और रणनीतिक रूप से काम कर रही है। नई योजना लागू होने के बाद मैंगलोर और अन्य केंद्रों की भंडारण क्षमता कई गुना बढ़ जाएगी, जिससे भारत को अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल सप्लाई में आने वाली दिक्कतों से बड़ी राहत मिलेगी।
LPG का भी बनेगा विशाल रणनीतिक भंडार
भारत सरकार पहले से ही देश के भीतर रणनीतिक तेल भंडार का दायरा बढ़ाने की दिशा में निरंतर काम कर रही है। साल 2021 में केंद्र सरकार ने ओडिशा के चांदीखोल और कर्नाटक के पादुर में 6.5 मिलियन टन की संयुक्त क्षमता वाले नए रणनीतिक रिजर्व बनाने को मंजूरी दी थी। यह महत्वाकांक्षी परियोजना पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप (PPP) मॉडल के तहत विकसित की जा रही है। इसके साथ ही भारत अब रसोई गैस (LPG) का भी करीब 20 से 30 दिनों का विशाल रणनीतिक भंडार बनाने पर गंभीरता से विचार कर रहा है।
यूएई बढ़ाएगा कच्चे तेल का वैश्विक उत्पादन
घरेलू मांग को पूरा करने के लिए ADNOC और इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन के बीच एलपीजी सप्लाई बढ़ाने को लेकर भी एक दीर्घकालिक समझौता संपन्न हुआ है। माना जा रहा है कि इससे भारत के ग्रामीण और शहरी इलाकों में लंबे समय तक एलपीजी की बेहद स्थिर और सस्ती सप्लाई सुनिश्चित हो सकेगी। आपको बता दें कि यूएई वर्तमान में भारत को कच्चे तेल की सप्लाई करने वाले शीर्ष पांच देशों की सूची में शामिल है। इसके अलावा दोनों मित्र देशों के बीच एलएनजी और प्राकृतिक गैस को लेकर भी कई बड़े समझौते प्रभावी हैं।

