Mumbai News: अनियोजित या अनचाही गर्भावस्था किसी भी महिला या जोड़े के लिए मानसिक और शारीरिक रूप से बेहद तनावपूर्ण हो सकती है। अक्सर लोग सामाजिक दबाव, डर या शर्म के कारण बिना किसी डॉक्टरी सलाह के गलत कदम उठा लेते हैं। ऐसी संवेदनशील स्थिति में घबराने के बजाय सही और सटीक चिकित्सा जानकारी प्राप्त करना बेहद जरूरी होता है। सबसे पहला कदम हमेशा एक योग्य स्त्री रोग विशेषज्ञ से मिलकर सही परामर्श लेना होना चाहिए।
यदि महिला के पीरियड्स मिस हो जाते हैं और गर्भावस्था की पूरी संभावना होती है, तो तुरंत यूरिन प्रेग्नेंसी टेस्ट करना चाहिए। यदि घरेलू जांच का नतीजा पॉजिटिव आता है, तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना आवश्यक है। डॉक्टर अल्ट्रासाउंड जांच के माध्यम से गर्भ की सही स्थिति और समय की पुष्टि करते हैं। इस दौरान महिला को खुद को दोष देने के बजाय अपने पार्टनर के साथ मिलकर शांत दिमाग से उचित निर्णय लेना चाहिए।
बिना डॉक्टरी सलाह के अबॉर्शन पिल्स लेना हो सकता है जानलेवा
आजकल इंटरनेट या दोस्तों के कहने पर सीधे मेडिकल स्टोर से अबॉर्शन पिल्स खरीदकर खाना एक खतरनाक चलन बन गया है। बिना डॉक्टर की निगरानी के ऐसी दवाएं लेना जानलेवा साबित हो सकता है। हर महिला का शरीर और उसकी मेडिकल स्थिति अलग होती है। बिना जांच दवा लेने से अत्यधिक ब्लीडिंग, अधूरा गर्भपात और गर्भाशय में जानलेवा इन्फेक्शन हो सकता है। कई बार गंभीर मामलों में महिला को तुरंत इमरजेंसी सर्जरी की जरूरत पड़ जाती है।
असुरक्षित या अवैध तरीके से कराया गया गर्भपात महिला के स्वास्थ्य को पूरी तरह तबाह कर सकता है। इससे गर्भाशय को गंभीर चोट पहुंच सकती है और भविष्य के लिए भारी हार्मोनल असंतुलन पैदा हो सकता है। शारीरिक नुकसान के अलावा महिलाएं गहरे मानसिक अवसाद, तनाव और एंग्जायटी का शिकार भी हो जाती हैं। प्रशिक्षित डॉक्टरों की देखरेख में कराया गया गर्भपात ही पूरी तरह सुरक्षित होता है, जहां मरीज को उचित काउंसलिंग भी दी जाती है।
क्या गर्भपात से भविष्य में मां बनने पर पड़ता है असर?
अक्सर महिलाओं के मन में यह बड़ा डर रहता है कि गर्भपात के बाद वे कभी मां नहीं बन पाएंगी। डॉक्टरों के अनुसार यदि गर्भपात पूरी तरह सुरक्षित तरीके से और सही समय पर किया जाए, तो फर्टिलिटी पर कोई बुरा असर नहीं पड़ता है। हालांकि, बार-बार गर्भपात कराना या असुरक्षित तरीके अपनाना भविष्य की प्रेग्नेंसी में मुश्किलें खड़ी कर सकता है। संक्रमण और अंदरूनी चोटों के कारण बांझपन का खतरा बढ़ जाता है।
इसी तरह अनप्रोटेक्टेड सेक्स के बाद बार-बार इमरजेंसी कॉन्ट्रासेप्टिव पिल्स खाना भी सेहत के लिए नुकसानदेह है। ये दवाएं केवल आपातकालीन स्थिति के लिए होती हैं, इन्हें नियमित गर्भनिरोधक बिल्कुल न समझें। इनके अत्यधिक इस्तेमाल से पीरियड्स पूरी तरह अनियमित हो जाते हैं और ओव्यूलेशन चक्र बिगड़ जाता है। इससे उल्टी, सिरदर्द और भारी कमजोरी हो सकती है। इसलिए सुरक्षित शारीरिक संबंधों के लिए हमेशा डॉक्टरों द्वारा प्रमाणित नियमित गर्भनिरोधक उपाय ही अपनाने चाहिए।
भारत में गर्भपात को लेकर क्या कहता है कानून?
भारत में मेडिकल टर्मिनेशन ऑफ प्रेग्नेंसी (MTP) कानून के तहत महिलाओं को गर्भपात का कानूनी अधिकार दिया गया है। देश के कानून के अनुसार सामान्य परिस्थितियों में 20 हफ्तों तक सुरक्षित गर्भपात कराया जा सकता है। कुछ विशेष और अत्यंत गंभीर परिस्थितियों जैसे बलात्कार, नाबालिग की प्रेग्नेंसी या भ्रूण में गंभीर विकृति होने पर इस समय सीमा को बढ़ाकर 24 हफ्ते किया गया है। इसके लिए मेडिकल बोर्ड और योग्य डॉक्टरों की मंजूरी अनिवार्य होती है।

