वैश्विक संकट पर पीएम मोदी की बड़ी चेतावनी: नीदरलैंड्स से अमेरिका, इजरायल और ईरान को कड़ा संदेश, क्या दुनिया में मचेगी आर्थिक तबाही?

The Hague News: दुनिया इस वक्त एक साथ कई अभूतपूर्व और गंभीर संकटों के दौर से गुजर रही है। कहीं कच्चे तेल की सप्लाई ठप होने का डर है, तो कहीं आसमान छूती महंगाई आम नागरिकों की कमर तोड़ रही है। इसी बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नीदरलैंड्स के हेग में एक ऐसा ऐतिहासिक बयान दिया है, जिसने वैश्विक भू-राजनीति में एक नई बहस छेड़ दी है। पीएम मोदी ने चेतावनी दी कि अगर वैश्विक शक्तियों ने अपनी नीतियां नहीं बदलीं, तो करोड़ों लोग दोबारा गरीबी के दलदल में धंस जाएंगे।

मौजूदा दशक बन रहा ‘आपदाओं का काल’, हेग से पीएम मोदी की गंभीर चेतावनी

नीदरलैंड्स के हेग में भारतीय समुदाय को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री ने वर्तमान वैश्विक परिदृश्य का बेहद सटीक विश्लेषण प्रस्तुत किया। उन्होंने स्पष्ट कहा कि मौजूदा दशक धीरे-धीरे “आपदाओं का दशक” (Disaster Decade) साबित हो रहा है। पहले पूरी दुनिया ने कोरोना महामारी का दंश झेला, उसके बाद वैश्विक स्तर पर विनाशकारी युद्ध शुरू हो गए। अब इन परिस्थितियों के कारण पूरी मानवता के सामने एक बड़ा और भयावह ऊर्जा संकट खड़ा हो गया है, जो बेहद चिंताजनक है।

होर्मुज स्ट्रेट पर गहराया सुरक्षा संकट, कच्चे तेल के बाजार में मची भारी उथल-पुथल

राजनीतिक विशेषज्ञों के अनुसार, पीएम मोदी का यह बयान सीधे तौर पर मध्य-पूर्व (पश्चिम एशिया) में जारी अत्यधिक तनाव की ओर इशारा है। अमेरिका, ईरान और इजरायल के बीच बढ़ते टकराव के कारण वैश्विक तेल बाजार में भारी अस्थिरता आ चुकी है। व्यापार के लिए बेहद महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग ‘होर्मुज स्ट्रेट’ पर मंडराते खतरों ने दुनिया के तमाम देशों को अपनी ऊर्जा सुरक्षा की समीक्षा करने पर मजबूर कर दिया है। इस मार्ग के बाधित होने से ईंधन की आपूर्ति ठप हो सकती है।

भारत और नीदरलैंड्स मिलकर बनाएंगे पारदर्शी और मजबूत ग्लोबल सप्लाई चेन

प्रधानमंत्री ने अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत की लगातार मजबूत होती आर्थिक और रणनीतिक भूमिका को भी रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि भारत की प्रगति में ही पूरी मानवता का कल्याण छिपा हुआ है। कोरोना काल के बाद दुनिया ने यह अच्छी तरह समझ लिया है कि आपूर्ति के लिए किसी एक क्षेत्र पर निर्भर रहना कितना खतरनाक है। इसी वजह से अब भारत और नीदरलैंड्स मिलकर एक बेहद पारदर्शी, सुरक्षित और भविष्य के लिए तैयार “रेजिलिएंट सप्लाई चेन” के निर्माण पर तेजी से काम कर रहे हैं।

यूरोप दौरे से पहले पीएम मोदी की ‘सादगी अपील’, ईंधन बचाने को बताया सच्ची देशभक्ति

अपनी इस महत्वपूर्ण विदेश यात्रा पर रवाना होने से पहले प्रधानमंत्री ने हैदराबाद में देशवासियों से एक खास अपील की थी। उन्होंने देश के नागरिकों से “स्वैच्छिक सादगी” की जीवनशैली अपनाने का आग्रह किया था। पीएम मोदी ने विदेशी मुद्रा भंडार की बचत करने और देश को आर्थिक नुकसान से बचाने के लिए लोगों से जहां तक संभव हो वर्क फ्रॉम होम करने, अनावश्यक विदेशी दौरों से बचने और सोने की भारी खरीदारी को कुछ समय के लिए सीमित रखने को कहा था।

सरकारी तेल कंपनियों ने दिया बड़ा झटका, चार साल बाद पेट्रोल-डीजल की कीमतें बढ़ीं

इस वैश्विक उथल-पुथल का सीधा और तात्कालिक असर अब भारतीय उपभोक्ताओं की जेब पर भी साफ दिखने लगा है। देश की प्रमुख सरकारी तेल कंपनियों—इंडियन ऑयल, भारत पेट्रोलियम और हिंदुस्तान पेट्रोलियम ने चार साल के लंबे अंतराल के बाद ईंधन की कीमतों में सीधे ₹3 प्रति लीटर की भारी बढ़ोतरी कर दी है। इस फैसले के बाद राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में पेट्रोल की कीमत ₹97.77 प्रति लीटर और डीजल की कीमत ₹90.67 प्रति लीटर के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई है।

महंगे ईंधन से बढ़ेगा मालभाड़ा, रोजमर्रा की चीजों और सब्जियों के दाम बढ़ने की आशंका

बाजार के जानकारों का कहना है कि ईंधन की कीमतों में हुई इस बढ़ोतरी का असर सिर्फ पेट्रोल पंपों तक सीमित नहीं रहेगा। आने वाले दिनों में देश के भीतर ट्रांसपोर्टेशन (मालभाड़ा) काफी महंगा हो जाएगा। इसके चलते मंडियों में सब्जियों से लेकर आम जरूरत की सभी घरेलू चीजों के दाम तेजी से बढ़ सकते हैं। इस मूल्यवृद्धि का सीधा और बेहद नकारात्मक असर देश के कृषि क्षेत्र, औद्योगिक उत्पादन और लॉजिस्टिक्स से जुड़े व्यवसायों पर भी पड़ने की पूरी आशंका है।

पूरी दुनिया के लिए अलार्म बेल है पीएम मोदी का संदेश, जिम्मेदार व्यवहार जरूरी

देखा जाए तो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का यह संदेश सिर्फ भारत के लिए नहीं, बल्कि पूरी वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए एक बड़ी चेतावनी है। अंतरराष्ट्रीय मोर्चे पर युद्ध के लगातार बढ़ते खतरे और घरेलू मोर्चे पर महंगाई ने सरकारों की नींद उड़ा रखी है। पीएम मोदी ने अपने संबोधन में साफ कर दिया कि जब तक सभी देश एकजुट होकर अपनी सप्लाई चेन को मजबूत नहीं करेंगे और जिम्मेदार आर्थिक नीतियां नहीं अपनाएंगे, तब तक आने वाले इस बड़े वैश्विक मंदी के संकट से बचना नामुमकिन होगा।

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