World News: वैश्विक शांति की दिशा में एक बहुत बड़ा कदम उठाते हुए अमेरिका और ईरान के बीच आखिरकार ऐतिहासिक सीजफायर समझौता हो गया है। फ्रांस में इस महत्वपूर्ण शांति समझौते पर हस्ताक्षर होने के बाद, अब आगे की रणनीतिक बातचीत स्विट्जरलैंड में आयोजित की जाएगी।
स्विस विदेश मंत्रालय ने एक आधिकारिक बयान जारी कर इस बेहद संवेदनशील और बड़े राजनयिक घटनाक्रम की पुष्टि की है। स्विस सरकार के मुताबिक, अमेरिका और ईरान के शीर्ष राजनयिकों के बीच प्रारंभिक दौर की वार्ता शुक्रवार को स्विट्जरलैंड के खूबसूरत पर्वतीय रिसॉर्ट बर्गेनस्टॉक में होगी।
वर्साय के महल में डोनाल्ड ट्रंप ने किए एमओयू पर हस्ताक्षर
सालों से चले आ रहे इस भयानक सैन्य संघर्ष को खत्म करने के लिए बुधवार रात फ्रांस के ऐतिहासिक पैलेस ऑफ वर्साय में एक अंतरिम समझौते पर दस्तखत किए गए। इस बेहद खास मौके पर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों व्यक्तिगत रूप से मौजूद थे।
अमेरिकी राष्ट्रपति के हस्ताक्षर करने के तुरंत बाद ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन ने भी तेहरान से इलेक्ट्रॉनिक माध्यम के जरिए इस समझौते को अपनी आधिकारिक मंजूरी दे दी। इस ऐतिहासिक शांति समझौते के बाद दोनों देशों के बीच जारी भीषण गोलाबारी और सैन्य तनाव पर तुरंत रोक लग गई है।
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को दोबारा खोलने और नाकेबंदी हटाने पर बनी सहमति
इस बड़े अंतरराष्ट्रीय समझौते के तहत ईरान और लेबनान में जारी तमाम तरह की सैन्य कार्रवाइयों को तुरंत रोकने पर सहमति बनी है। इसके अलावा वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए सबसे महत्वपूर्ण जलमार्ग ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ को व्यापार के लिए फिर से खोलने का फैसला किया गया है।
इसके बदले में अमेरिका भी ईरान के खिलाफ लगाई गई अपनी सख्त नौसैनिक नाकेबंदी को पूरी तरह से समाप्त कर देगा। पहले इस महासमझौते पर 19 जून को स्विट्जरलैंड में हस्ताक्षर होने थे, लेकिन दोनों देशों की तत्परता के कारण इसे तय समय से एक दिन पहले ही पूरा कर लिया गया।
बर्गेनस्टॉक में मध्यस्थ देशों के साथ बैठेंगे अमेरिका और ईरान
स्विस मंत्रालय के अनुसार, योजना के मुताबिक अमेरिका और ईरान के प्रतिनिधि कल बर्गेनस्टॉक में आमने-सामने बैठेंगे। इस अहम बैठक में मध्यस्थ देश पाकिस्तान और कतर भी शामिल होंगे, ताकि इस बड़े ऐतिहासिक शांति समझौते को पूरी तरह जमीन पर लागू करने की शुरुआती रूपरेखा तैयार की जा सके।
ईरानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बाघेई ने साफ किया है कि दोनों राष्ट्रपतियों के दस्तखत के बाद अब स्विट्जरलैंड में कोई नया हस्ताक्षर समारोह नहीं होगा। अब पूरा ध्यान समझौते के कड़े क्रियान्वयन पर है, हालांकि स्विस सरकार ने सुरक्षा कारणों से बैठक के अन्य विवरण साझा नहीं किए हैं।
Author: Pallavi Sharma


