इतिहास में पहली बार देश की आबादी रोकने के लिए वोटिंग, जानें इस ऐतिहासिक फैसले से क्यों डरी पूरी दुनिया

World News: स्विट्जरलैंड इतिहास में पहली बार अपनी बढ़ती जनसंख्या पर औपचारिक सीमा लगाने के लिए एक ऐतिहासिक वोटिंग (मतदान) करा रहा है। यहां के नागरिक अपनी कुल आबादी को 1 करोड़ (10 मिलियन) तक सीमित करने के विवादित प्रस्ताव पर फैसला करेंगे।

इस बेहद चौंकाने वाले जनमत संग्रह पर इस समय पूरे यूरोप की नजरें टिकी हुई हैं। अंतरराष्ट्रीय राजनीतिक और आर्थिक विशेषज्ञ स्विट्जरलैंड में हो रहे इस बड़े घटनाक्रम को देश का नया ‘ब्रेक्सिट मोमेंट’ कहकर बुला रहे हैं।

दक्षिणपंथी स्विस पीपुल्स पार्टी (SVP) ने देश की संसद में यह अनोखा प्रस्ताव पेश किया है। इस नए कानून के जरिए साल 2050 तक देश की कुल आबादी को हर हाल में 1 करोड़ के भीतर रखने की मांग की गई है।

बेकाबू आप्रवासन से बुनियादी ढांचे पर बढ़ा भारी दबाव

इस प्रस्ताव के समर्थकों का दृढ़ विश्वास है कि बेकाबू आप्रवासन (Immigration) के कारण लोकल ट्रेनों में भीड़ बढ़ रही है। इसके साथ ही मकान लगातार महंगे हो रहे हैं और देश के पूरे बुनियादी ढांचे पर असहनीय दबाव काफी बढ़ गया है।

इसके विपरीत, स्विस सरकार, बड़े व्यापार संगठनों और आलोचकों ने इस कदम को पूरी तरह बेतुका और खतरनाक बताया है। उनका तर्क है कि इस फैसले से देश में बहुत गंभीर लेबर शॉर्टेज (कामगारों की कमी) पैदा हो जाएगी।

यूरोपीय संघ (EU) के साथ मुक्त आवागमन समझौता टूटने से स्विट्जरलैंड दुनिया से पूरी तरह अलग-थलग पड़ सकता है। पिछले दो दशकों में यूरोपीय संघ के साथ समझौता होने के बाद से यहां की जनसंख्या 73 लाख से बढ़कर 91 लाख हो चुकी है।

आज स्विट्जरलैंड की लगभग 27 प्रतिशत आबादी विदेशी नागरिकों की है, जो पूरे यूरोप में सबसे अधिक अनुपातों में से एक है। एसवीपी का कहना है कि अनियंत्रित प्रवासियों के कारण देश अब अपनी क्षमता की अंतिम सीमा तक पहुंच रहा है।

कैसे काम करेगा जनसंख्या नियंत्रण का यह नया कानून

इस कानून के तहत यदि देश की जनसंख्या 95 लाख तक पहुंच जाती है, तो अधिकारियों को कड़े कदम उठाने होंगे। इनमें शरण संबंधी बेहद सख्त नियम और विदेशी निवासियों के लिए परिवार बुलाने पर पूर्ण प्रतिबंध शामिल हो सकते हैं।

यदि जनसंख्या नियंत्रण के ये तमाम उपाय विफल रहे, तो स्विट्जरलैंड को यूरोपीय संघ के साथ अपना ‘मुक्त आवागमन समझौता’ तोड़ना पड़ेगा। हालांकि, इस ऐतिहासिक बिल को पास होने के लिए देश के बहुसंख्यक मतदाताओं और राज्यों की मंजूरी जरूरी है।

आलोचकों के अनुसार स्विट्जरलैंड का स्वास्थ्य, तकनीक, वित्त और होटल उद्योग पूरी तरह से विदेशी कामगारों के भरोसे चलता है। तेजी से बूढ़ी होती आबादी के कारण आने वाले समय में देश में नए श्रमिकों और करदाताओं की मांग और ज्यादा बढ़ेगी।

ऐसे में प्रवासन पर पूर्ण रोक लगाने से देश में श्रम का बड़ा संकट गहरा सकता है। इसके अलावा, यूरोपीय संघ से संबंध बिगड़ने के कारण स्विट्जरलैंड को यूरोपीय बाजारों से पूरी तरह हाथ धोना पड़ सकता है, जो अर्थव्यवस्था को बर्बाद कर देगा।

Author: Pallavi Sharma

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