Himachal Pradesh News: हिमाचल प्रदेश के मंडी जिले के बहुचर्चित मीर बक्श भूमि विवाद मामले में सुप्रीम कोर्ट से राज्य सरकार को बड़ा झटका लगा है। शीर्ष अदालत ने मामले में दायर पुनर्विचार याचिका को पूरी तरह खारिज कर दिया है। इस फैसले के बाद अब मामला एक बार फिर सुर्खियों में आ गया है।
सर्वोच्च अदालत के इस ताजा आदेश के बाद अब 19 जुलाई 2023 का पुराना फैसला बिल्कुल बरकरार रहेगा। अदालत ने दिव्यांशु राणा की ओर से दायर रिव्यू पिटीशन को खारिज करते हुए स्पष्ट किया कि इस ऐतिहासिक फैसले की दोबारा समीक्षा करने का कोई कानूनी आधार नहीं बनता है।
जानिए आखिर क्या है 1061 करोड़ का मीर बक्श भूमि विवाद
यह पूरा कानूनी विवाद भारत विभाजन के बाद वर्ष 1957 में शुरू हुआ था। उस समय स्थानीय प्रशासन ने नेरचौक-भंगरोटू क्षेत्र की करीब 110 बीघा बेशकीमती भूमि को विस्थापित संपत्ति मानकर अपने कब्जे में ले लिया था। इसके बाद पीड़ित परिवार ने इसके खिलाफ लंबी अदालती जंग शुरू की।
जमीन के मूल मालिक मीर बक्श और उनके उत्तराधिकारियों ने कोर्ट में दावा किया कि उनका पूरा परिवार कभी पाकिस्तान गया ही नहीं था। इसलिए सरकारी प्रशासन द्वारा उनकी पुश्तैनी जमीन का यह अधिग्रहण पूरी तरह अवैध था। हाई कोर्ट के बाद सुप्रीम कोर्ट ने भी उनके पक्ष में फैसला सुनाया।
सरकारी खजाने पर पड़ेगा भारी बोझ, जमीन पर बना मेडिकल कॉलेज
पुश्तैनी जमीन के बदले अब पीड़ित उत्तराधिकारियों ने करीब 1,061 करोड़ रुपये के भारी-भरकम मुआवजे का दावा ठोक दिया है। वर्तमान में मीर बख्श की इसी विवादित जमीन पर नेरचौक का प्रसिद्ध मेडिकल कॉलेज बन चुका है। इतनी बड़ी धनराशि देना राज्य सरकार के लिए बेहद मुश्किल काम है।
अदालत के फैसले को आए करीब तीन वर्ष बीत चुके हैं, लेकिन पीड़ित परिवार को अब तक कोई अंतिम समाधान नहीं मिल पाया है। प्रशासन ने जमीन देने के लिए मंडी, सुंदरनगर, बल्ह और नाचन क्षेत्र में कुछ सरकारी भूमि चिह्नित की है, जिस पर बातचीत का दौर जारी है।
समाधान में देरी से नाराज भू-स्वामी ने खटखटाया हाई कोर्ट का दरवाजा
भू-स्वामी मीर बक्श ने बताया कि अगर प्रशासन के लिए पूरी जमीन वापस देना संभव नहीं है, तो वे कुछ भूमि और कुछ मुआवजा राशि के नए विकल्प पर भी गंभीरता से विचार कर सकते हैं। मामले में हो रही प्रशासनिक देरी से नाराज होकर उन्होंने अब दोबारा हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है।
Reported By: Sunita Gupta


