World News: ओमान के तट पर वाणिज्यिक पोत ‘एमटी सेट्टेबेलो’ पर हुए भीषण अमेरिकी हमले में तीन भारतीय नाविकों की मौत की दुखद पुष्टि हुई है। विदेश मंत्रालय (MEA) ने इस सैन्य हमले की बेहद कड़े शब्दों में तीव्र निंदा की है। इस घटना से देश भर में गहरा आक्रोश है।
रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के पास इस व्यापारिक जहाज को निशाना बनाया गया था। सरकारी सूत्रों के मुताबिक इस अंतरराष्ट्रीय पोत पर कुल 24 भारतीय क्रू सदस्य सवार थे। इनमें से 21 नागरिकों को स्थानीय राहत अभियान के तहत बहुत सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया है।
लापता चल रहे तीनों नागरिकों की मौत की आधिकारिक पुष्टि
शुरुआत में लापता चल रहे तीनों भारतीय नागरिकों की अब इस दुखद हादसे में मौत की आधिकारिक पुष्टि हो चुकी है। मस्कट स्थित भारतीय दूतावास पीड़ित परिवारों की मदद के लिए ओमान के शीर्ष प्रशासनिक अधिकारियों के साथ ग्राउंड जीरो पर लगातार समन्वय कर रहा है।
फॉरवर्ड सीमैन यूनियन ऑफ इंडिया के महासचिव मनोज यादव ने इस संकट पर गहरा दुख जताया है। उन्होंने मीडिया को बताया कि हमले के बाद से मुख्य पोत से हमारा संपर्क बुरी तरह टूट गया था। इस कारण जमीनी विवरणों की पुष्टि करने में काफी समय लगा।
अलग-अलग राज्यों के रहने वाले थे देश के तीनों होनहार सपूत
अमेरिकी नौसेना के इस हिंसक हमले में मारे गए तीनों होनहार नाविक भारत के अलग-अलग राज्यों के रहने वाले थे। यूनियन की तरफ से मिली जानकारी के मुताबिक ये तीनों नागरिक हिमाचल प्रदेश, देवरिया (उत्तर प्रदेश) और आंध्र प्रदेश के मूल निवासी थे।
सीमैन यूनियन ऑफ इंडिया (एफएसयूआइ) ने मृतकों के नामों का भी आधिकारिक खुलासा किया है। हमले में शहीद होने वालों में हिमाचल के आदित्य शर्मा (डेक कैडेट), देवरिया के शिवानंद चौरसिया (इंजन फिटर) और आंध्र प्रदेश के पटनाला सुरेश (चीफ इंजीनियर) शामिल हैं।
सीमैन यूनियन का बड़ा दावा, अमेरिकी नौसेना को थी पूरी जानकारी
महासचिव मनोज यादव ने इस सैन्य कार्रवाई पर वाशिंगटन को आड़े हाथों लिया है। उन्होंने कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि मैं यह मानने से बिल्कुल इनकार करता हूं कि अमेरिका को उस जहाज पर सवार क्रू मेंबर्स की राष्ट्रीयता के बारे में पहले से पता नहीं था।
उन्होंने दावा किया कि मुझे शत-प्रतिशत पूरा यकीन है कि अमेरिकी नौसेना को ठीक-ठीक पता था कि उस बड़े जहाज पर कितने भारतीय और विदेशी नागरिक मौजूद थे। अगर जहाजों ने उनके सैन्य निर्देशों का पालन नहीं किया था, तो उन्हें हिरासत में लेना चाहिए था।
वाणिज्यिक जहाजों पर हमले रोकना वैश्विक शांति के लिए बहुत जरूरी
यूनियन प्रमुख के मुताबिक हिरासत में लेने के बजाय सीधे घातक मिसाइल हमला करना किसी भी अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत जायज नहीं ठहराया जा सकता। इससे पहले विदेश मंत्रालय ने सोमवार को भी इस घटना को बेहद चिंताजनक बताते हुए कड़ा बयान जारी किया था।
ओमान में मौजूद भारतीय राजनयिक स्थिति पर बहुत बारीक नजर रख रहे हैं। भारत सरकार ने अंतरराष्ट्रीय मंच पर दोटूक कहा है कि कमर्शियल नौवहन को इस तरह निशाना बनाना तुरंत बंद होना चाहिए। निर्दोष नागरिकों की सुरक्षा के लिए इस समुद्री जलमार्ग पर शांति बहाल होना जरूरी है।
Author: Pallavi Sharma


