ट्रंप के ‘सीजफायर’ दावे पर ईरान का सबसे बड़ा डिजिटल पलटवार, ‘प्राइवेट चैट’ लीक कर उड़ाया सरेआम मजाक!

Middle East News: मध्य पूर्व के तनावपूर्ण माहौल के बीच अब एक नई ‘सोशल मीडिया वॉर’ शुरू हो गई है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हाल ही में ईरान के साथ बातचीत सफल होने का दावा किया था। उन्होंने कहा था कि इस बातचीत के बाद पांच दिनों के सीजफायर पर सहमति बनी है। लेकिन ईरान ने ट्रंप के इस दावे को सिरे से खारिज कर दिया है। इसे झूठा साबित करने के लिए ईरान ने एक बेहद अनोखा और मजाकिया तरीका अपनाया है। सऊदी अरब स्थित ईरानी दूतावास के आधिकारिक एक्स (पूर्व में ट्विटर) हैंडल से एक स्क्रीनशॉट शेयर किया गया है। यह स्क्रीनशॉट एक प्राइवेट चैट जैसा दिखता है। इसमें ट्रंप लगातार मैसेज कर रहे हैं, लेकिन सामने से कोई जवाब नहीं आ रहा है। यह असल चैट नहीं है, बल्कि कूटनीतिक तरीके से ट्रंप का मजाक उड़ाने की एक चाल है।

खुद को ही मैसेज भेज रहे ट्रंप?

ईरानी दूतावास ने इस कथित स्क्रीनशॉट के जरिए ट्रंप की ‘डिप्लोमेसी’ की सरेआम खिल्ली उड़ाई है। इस वायरल स्क्रीनशॉट में सबसे ऊपर ‘President of PEACE (You)’ लिखा हुआ है। इसके ठीक नीचे ‘मैसेज योरसेल्फ’ (खुद को मैसेज करें) का फीचर नजर आ रहा है। ईरान इसके जरिए यह संदेश देना चाहता है कि ट्रंप ने सीजफायर के सारे मैसेज खुद को ही भेजे हैं। उन्होंने खुद ही मान लिया है कि ईरान उनकी बातों से सहमत है। इस तस्वीर में दिख रहा है कि ट्रंप ने ‘Hey Ayatollah’ और ‘I will cease attacks for 5days’ जैसे मैसेज टाइप किए हैं। दूसरी तरफ से कोई भी रिप्लाई नहीं आया है।

‘यही है सफल बातचीत’ का तंज

ईरानी दूतावास ने ट्रंप के ही शब्दों का इस्तेमाल करते हुए उन पर तीखा तंज कसा है। दूतावास ने चश्मा पहने हुए एक इमोजी के साथ पोस्ट में लिखा, ‘यही है ईरान के साथ हुई अच्छी और सफल बातचीत।’ यह पोस्ट साफ इशारा करती है कि ट्रंप की नजर में जो ‘सफल कूटनीति’ है, वह ईरान के लिए महज एक मजाक से ज्यादा कुछ नहीं है।

क्या ट्रंप की सीजफायर डिप्लोमेसी फेल है?

ट्रंप ने पूरी दुनिया के सामने दावा किया था कि उन्होंने पांच दिनों के लिए युद्ध रोकने का अहम फैसला किया है। उन्होंने इस फैसले के पीछे ईरान के साथ हुई सकारात्मक बातचीत का हवाला दिया था। लेकिन ईरान के इस डिजिटल पलटवार ने ट्रंप के दावों की पोल खोल दी है। इस घटना ने कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। सबसे बड़ा सवाल भरोसे की कमी का है। क्या वाकई दोनों देशों के बीच कोई आधिकारिक बातचीत हुई है? या फिर ट्रंप सिर्फ अपनी अंतरराष्ट्रीय छवि सुधारने के लिए ऐसे हवाई दावे कर रहे हैं। ईरान ने अपने सख्त रुख से यह साफ कर दिया है कि वह अमेरिका के किसी भी एकतरफा प्रस्ताव के आगे नहीं झुकेगा। अंतरराष्ट्रीय कूटनीति की दुनिया में ऐसा मजाक बहुत कम देखने को मिलता है। यह बताता है कि दोनों देशों के बीच कड़वाहट अब एक नए और गहरे स्तर पर पहुंच चुकी है।

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