ट्रंप का मास्टरस्ट्रोक! ईरान से समझौते के बाद इराक के पीएम को बुलावा, क्या बदलने वाला है मध्य पूर्व का नक्शा?

World News: ईरान और अमेरिका के बीच हाल ही में एक ऐतिहासिक शांति समझौता हुआ है। इसके बाद मध्य पूर्व की राजनीति में बड़े बदलाव देखने को मिल रहे हैं। इस समझौते के तुरंत बाद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इराकी प्रधानमंत्री अली अल-जैदी को जुलाई में व्हाइट हाउस आने का खास निमंत्रण भेजा है।

दोनों देशों ने इस अहम मुलाकात को लेकर एक संयुक्त बयान जारी किया है। इसमें स्पष्ट रूप से कहा गया है कि अमेरिकी प्रशासन इस दौरे को लेकर बेहद उत्साहित है। ट्रंप मध्य जुलाई में इराकी प्रधानमंत्री का भव्य स्वागत करने वाले हैं। यह मुलाकात मध्य पूर्व में नई कूटनीतिक शुरुआत का संकेत दे रही है。

इराक की भौगोलिक स्थिति और कूटनीतिक भूमिका

ईरान और अमेरिका के रिश्तों में आने वाले किसी भी बदलाव का सीधा असर हमेशा इराक पर पड़ता है। इसकी सबसे बड़ी वजह इराक की महत्वपूर्ण भौगोलिक स्थिति है। इराक सीधे तौर पर ईरान का पड़ोसी है। वहीं दूसरी तरफ अमेरिका लंबे समय से इराक की सुरक्षा, अर्थव्यवस्था और राजनीतिक व्यवस्था से गहराई से जुड़ा है।

इराक को हमेशा से क्षेत्रीय संतुलन का मुख्य केंद्र माना जाता है। जब भी अमेरिका और ईरान के बीच तनाव बढ़ता है, तो इराक में सुरक्षा चुनौतियां काफी बढ़ जाती हैं। अब जब दोनों देशों ने शांति का रास्ता चुना है, तो इराक को भी इन नई परिस्थितियों के अनुसार अपनी रणनीतियों में बदलाव करना होगा।

बगदाद में विशेष दूत की अहम बैठक

शांति समझौते की इस नई कड़ी में अमेरिकी राष्ट्रपति के विशेष दूत टॉम बैरक ने हाल ही में बगदाद का दौरा किया है। वहां उन्होंने प्रधानमंत्री अली अल-जैदी के साथ मिलकर कई बेहद महत्वपूर्ण मुद्दों पर लंबी चर्चा की है। इस दौरान दोनों नेताओं ने क्षेत्रीय स्थिरता और सुरक्षा सहयोग को और अधिक मजबूत बनाने पर जोर दिया।

बगदाद में हुई इस उच्च स्तरीय बातचीत में सबसे ज्यादा ध्यान सशस्त्र समूहों पर केंद्रित रहा। दूत और प्रधानमंत्री ने उन गुटों के भविष्य पर गंभीरता से विचार किया, जो वर्तमान में राज्य के सीधे नियंत्रण से पूरी तरह बाहर होकर काम कर रहे हैं। इन समूहों पर लगाम लगाना इराक की आंतरिक शांति के लिए जरूरी है।

कूटनीतिक जानकारों का मानना है कि इराक आने वाले समय में अमेरिका और ईरान के बीच बेहतरीन संतुलन बना सकता है। व्हाइट हाउस में होने वाली यह प्रस्तावित बैठक सिर्फ द्विपक्षीय संबंधों तक सीमित नहीं रहने वाली है। इसका व्यापक असर पूरे मध्य पूर्व की कूटनीति और रणनीतिक राजनीति पर बहुत स्पष्ट रूप से दिखाई देगा।

Author: Pallavi Sharma

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