Gujarat News: गुजरात के मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने 24 मार्च को विधानसभा में यूनिफॉर्म सिविल कोड यानी यूसीसी बिल पेश कर दिया है। सरकार इसे समानता की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम बता रही है। इस बिल का सीधा असर आपकी शादी, तलाक, संपत्ति के बंटवारे और लिव-इन रिलेशनशिप पर पड़ने वाला है। सरकार का दावा है कि इससे महिलाओं को सबसे ज्यादा फायदा होगा। वहीं विपक्ष इसे पूरी तरह से राजनीति से जोड़कर देख रहा है। आइए समझते हैं कि इस नए कानून के लागू होने से गुजरात के आम नागरिक की जिंदगी में क्या कुछ बदल जाएगा।
एक देश, एक कानून की दिशा में कदम
इस बिल का सबसे मुख्य उद्देश्य सभी नागरिकों के लिए एक समान कानून बनाना है। अब तक धर्म के आधार पर शादी और संपत्ति के अलग-अलग नियम होते थे। सरकार ने कहा है कि अब पर्सनल लॉ की जगह एक ही नियम लागू होगा। मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने इसे संविधान के अनुच्छेद 14 से जोड़ा है। उन्होंने याद दिलाया कि राम मंदिर और अनुच्छेद 370 हटाने के बाद यह सरकार का एक और बड़ा फैसला है। हालांकि इस बिल से आदिवासी समुदायों को बाहर रखा गया है। साथ ही कजिन मैरिज जैसी कुछ पारंपरिक प्रथाओं को भी फिलहाल छूट दी गई है।
लिव-इन रिलेशनशिप और तलाक पर सख्ती
रिश्तों को लेकर इस नए बिल में बेहद कड़े नियम बनाए गए हैं। अब गुजरात में लिव-इन रिलेशनशिप का रजिस्ट्रेशन कराना पूरी तरह अनिवार्य होगा। अगर कोई जोड़ा बिना रजिस्ट्रेशन के लिव-इन में रहता है, तो उसे तीन महीने तक की जेल हो सकती है। इसके अलावा कोर्ट के बाहर दिए गए तलाक को अब अमान्य माना जाएगा। ऐसा करने पर तीन साल की सजा का कड़ा प्रावधान है। जबरन शादी और बहुविवाह के खिलाफ भी सरकार ने बेहद सख्त रुख अपनाया है। इन अपराधों में दोषी पाए जाने पर सात साल तक की सजा हो सकती है।
बेटियों को पैतृक संपत्ति में बराबर का हक
इस कानून का सबसे ज्यादा और सीधा असर महिलाओं के अधिकारों पर पड़ेगा। नए बिल के मुताबिक अब बेटियों को पैतृक संपत्ति में बेटों के बराबर ही हिस्सा मिलेगा। अगर किसी व्यक्ति का निधन बिना वसीयत बनाए हो जाता है, तो उसकी संपत्ति माता-पिता, पति या पत्नी और बच्चों के बीच बराबर बांटी जाएगी। राज्य के गृह मंत्री हर्ष संघवी ने इसे महिलाओं के लिए एक स्वर्णिम दिन बताया है। उनका कहना है कि पुराने और अलग-अलग कानूनों की वजह से महिलाओं को हमेशा नुकसान उठाना पड़ा है।
शादी के रजिस्ट्रेशन पर भारी जुर्माना
सरकार ने अब विवाह पंजीकरण को पूरी तरह से जरूरी कर दिया है। अगर कोई जोड़ा अपनी शादी का रजिस्ट्रेशन नहीं कराता है, तो शादी अवैध नहीं मानी जाएगी। लेकिन ऐसे जोड़ों को दस हजार से पच्चीस हजार रुपये तक का भारी जुर्माना भरना पड़ सकता है। जो शादियां यूसीसी लागू होने से पहले हुई हैं, उनके लिए भी सरकार एक विशेष प्रक्रिया बनाएगी। इससे पुराने मामले भी आसानी से नए सिस्टम के तहत दर्ज किए जा सकेंगे।
राजनीतिक विरोध और आगे का रास्ता
कांग्रेस पार्टी ने विधानसभा में इस बिल का कड़ा विरोध किया है। विपक्ष का सीधा आरोप है कि यह बिल जल्दबाजी में राजनीतिक फायदे के लिए लाया गया है। कांग्रेस का कहना है कि इसे पहले एक विशेषज्ञ समिति के पास भेजा जाना चाहिए था। विपक्ष ने सवाल उठाया है कि अगर कुछ समुदायों को बिल से बाहर रखा गया है, तो यह समानता कैसे हुई। फिलहाल यह बिल विधानसभा में है और इस पर लंबी बहस होने वाली है। यह सिर्फ एक राज्य का मामला नहीं है। इसका असर पूरे देश की राजनीति और भविष्य के कानूनों पर पड़ना तय है।


