New Delhi News: अमेरिकी सरकार द्वारा हाल ही में सार्वजनिक किए गए गोपनीय यूएफओ दस्तावेजों में भारत को लेकर एक बेहद चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। पेंटागन की इन डीक्लासिफाइड फाइलों के अनुसार, भारत के लद्दाख और सिक्किम सहित पूरे हिमालयी क्षेत्रों में साल 1968 में कई रहस्यमयी उड़ती वस्तुएं देखी गई थीं।
पेंटागन द्वारा शुक्रवार को जारी किए गए इन ऐतिहासिक दस्तावेजों में केंद्रीय खुफिया एजेंसी (सीआईए) की एक विशेष छह पेज की खुफिया रिपोर्ट भी शामिल है। इस रिपोर्ट में फरवरी और मार्च 1968 के दौरान भारतीय हवाई क्षेत्र में अनआइडेंटिफाइड एनामलस फेनोमेना (यूएपी) के साइटिंग्स का सिलसिलेवार ब्यौरा दर्ज है।
सिक्किम के आसमान में दिखी रहस्यमयी तेज रोशनी
सीआईए की खुफिया रिपोर्ट के अनुसार, 19 फरवरी 1968 को उत्तर सिक्किम के लाचुंग, लाचेन, ट्रांगु, मुगुथांग और छोल्हामू इलाकों में स्थानीय ग्रामीणों ने एक अजीबोगरीब उड़ती हुई वस्तु देखी थी। यह अज्ञात वस्तु उत्तर-पूर्व से दक्षिण-पश्चिम दिशा की ओर बहुत तेज गति से आगे बढ़ रही थी।
चश्मदीदों के मुताबिक उस उड़ती हुई वस्तु के पीछे से एक बेहद अजीब और चमकीली रोशनी निकल रही थी। वह रोशनी इतनी ज्यादा तेज थी कि उसकी वजह से आसपास का पूरा पहाड़ी इलाका अचानक पूरी तरह रोशन हो गया था। इसके कुछ ही देर बाद आसमान में बादलों के गरजने जैसी भयानक आवाज भी सुनी गई थी।
लद्दाख में हुए जोरदार धमाके और दिखा लाल धुआं
सिक्किम की घटना के बाद मार्च 1968 में भारत के रणनीतिक लद्दाख क्षेत्र में भी ऐसी कई रहस्यमयी घटनाएं लगातार दर्ज की गईं। रिपोर्ट के अनुसार 4 मार्च 1968 को लद्दाख के चांग ला, फुकचे और कोयुल क्षेत्रों में लोगों ने पूर्व से पश्चिम दिशा की ओर एक चमकीली सफेद रोशनी को उड़ते देखा था।
दस्तावेजों में कहा गया है कि इस घटना के दौरान हवा में दो बहुत जोरदार धमाकों जैसी आवाजें भी सुनी गई थीं। इसके तुरंत बाद आसमान में गहरा लाल रंग का प्रकाश और अजीब सफेद धुआं दिखाई दिया था। इसी दिन अने ला क्षेत्र में भी एक गोलाकार वस्तु धुआं छोड़ते हुए गोल रास्ते पर घूमती दिखी थी।
25,000 फीट की ऊंचाई पर उड़ रहा था अनोखा रॉकेट
अमेरिकी खुफिया एजेंसी की फाइल बताती है कि 25 मार्च 1968 को लद्दाख के ही फुकचे, कोयुल और डेमचोक क्षेत्रों में एक रॉकेट जैसी आकृति वाली विशाल वस्तु आकाश में मंडराती दिखी थी। इस अज्ञात यान के पीछे लगभग 200 गज लंबा सफेद और पीले रंग के धुएं का एक लंबा ट्रेल साफ दिखाई दे रहा था।
वायुमंडलीय अनुमानों के मुताबिक यह अज्ञात वस्तु करीब 20,000 से 25,000 फीट की अत्यधिक ऊंचाई पर उड़ रही थी। रिपोर्ट में पड़ोसी देश नेपाल के कास्की क्षेत्र की घटना का भी विशेष जिक्र है, जहां 27 मार्च 1968 को उत्तर से दक्षिण की ओर तेजी से जाती एक चमकदार वस्तु ने भारी कौतूहल पैदा किया था।
पोखरा के पास क्रैश हुआ था धातु का बड़ा डिस्क
नेपाल की इस घटना के बाद पोखरा के पास बाल्टिचौर नामक स्थान पर एक क्रेटर (गड्ढे) के भीतर एक विशाल धातु का डिस्क के आकार का ऑब्जेक्ट मिला था। इस क्रैश हुए अज्ञात ऑब्जेक्ट की ऊंचाई लगभग चार फीट और उसका निचला आधार छह फीट चौड़ा था, जिसने अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों को अलर्ट कर दिया था।
यह महत्वपूर्ण दस्तावेज अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के विशेष आदेश पर पुराने “अनआइडेंटिफाइड एनामलस फेनोमेना” (यूएपी) रिकॉर्ड्स को सार्वजनिक करने की सरकार की बड़ी मुहिम का हिस्सा हैं। इसमें 1940 के दशक से लेकर हाल के वर्षों तक की संवेदनशील घटनाओं, खुफिया वीडियो और तस्वीरों को शामिल किया गया है।
पेंटागन ने दी चेतावनी, नहीं मिले एलियंस के सबूत
हालांकि इन रहस्यमयी फाइलों को सार्वजनिक करने के साथ ही अमेरिकी रक्षा अधिकारियों ने बेहद सतर्क रहने की सलाह दी है। पेंटागन का कहना है कि कई ऐतिहासिक दस्तावेजों की चेन ऑफ कस्टडी को पूरी तरह सत्यापित नहीं किया जा सका है और अब तक किसी भी घटना में एलियन टेक्नोलॉजी या बाहरी जीवन के ठोस सबूत नहीं मिले हैं।
पेंटागन ने शुक्रवार को यूएफओ से जुड़ी फाइलों का यह तीसरा बड़ा सेट जारी किया है। इसमें अमेरिका के उत्तर-पूर्वी हिस्सों में देखे गए लाल रंग के चमकते गोलों की रिपोर्ट और एफबीआइ, सीआइए की 72 गुप्त फाइलें शामिल हैं। एक गवाही के अनुसार, तीन फीट चौड़े उस लाल गोले के बीच सूरज जैसा धधकती रोशनी का हिस्सा था।
Author: Pallavi Sharma

