Global News: दुनिया भर के तेल बाजारों में उस समय हलचल बढ़ गई जब अमेरिका द्वारा रूसी तेल बिक्री पर लगे प्रतिबंधों के स्थगन (Exemption) को आगे नहीं बढ़ाया गया। मंगलवार मध्य रात्रि को इस स्थगन की समयसीमा समाप्त हो चुकी है, जिसके बाद से वैश्विक ऊर्जा क्षेत्र में भारी अनिश्चितता का माहौल है।
यूक्रेन पर रूसी हमले के जवाब में साल 2022 में अमेरिका ने रूस के तेल कारोबार पर कड़े प्रतिबंध लगाए थे। बाद में, ईरान और अन्य वैश्विक संकटों के कारण पैदा हुए तेल संकट को रोकने के लिए अमेरिका ने इस पर से कुछ प्रतिबंध हटा लिए थे। इस कदम से अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों को नियंत्रित रखने में मदद मिली थी।
वर्तमान स्थिति यह है कि अमेरिका के वित्त विभाग ने अब तक इस स्थगन को बढ़ाने के लिए कोई आधिकारिक अधिसूचना जारी नहीं की है। वहीं, राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने फ्रांस में पूछे गए एक सवाल पर कोई स्पष्ट जवाब देने के बजाय मामले को ‘देखने’ की बात कही है। इस चुप्पी के कारण बाजार में संशय की स्थिति बनी हुई है।
क्या ईरान-अमेरिका युद्ध की समाप्ति से बदले समीकरण?
जानकारों का मानना है कि अब जबकि अमेरिका और ईरान के बीच युद्ध की समाप्ति पर सहमति बन गई है, तो अमेरिका अपनी पिछली सख्त नीतियों की ओर वापस लौट सकता है। यदि यह स्थगन वापस नहीं लिया जाता है, तो रूसी तेल की बिक्री पर अमेरिकी प्रतिबंध फिर से पूरी तरह प्रभावी हो जाएंगे।
भारत के दृष्टिकोण से यह खबर बेहद महत्वपूर्ण है, क्योंकि भारत रूसी कच्चे तेल का एक बड़ा खरीदार रहा है। रूसी तेल पर किसी भी नए प्रतिबंध का असर सीधे तौर पर भारत सहित कई विकासशील देशों के आयात बिल और घरेलू बाजार में तेल की कीमतों पर पड़ सकता है।
फिलहाल, बाजार विश्लेषकों का कहना है कि अगले कुछ दिनों तक स्थिति स्पष्ट नहीं होगी। रूस अपना तेल कारोबार अभी बदस्तूर जारी रखे हुए है, लेकिन अमेरिकी सरकार के किसी भी कड़े कदम से वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में बड़ा बदलाव आ सकता है। दुनिया की नजरें अब व्हाइट हाउस के अगले आधिकारिक फैसले पर टिकी हैं।
Author: Pallavi Sharma


