इलेक्ट्रिक कारों की दुनिया में महाक्रांति, चीनी वैज्ञानिकों ने बनाई अनोखी बैटरी, महज 3 मिनट में होगी फुल चार्ज

International News: वैश्विक स्तर पर इलेक्ट्रिक वाहनों (EVs) को तेजी से अपनाया जा रहा है। लेकिन सुस्त चार्जिंग रफ्तार और कम रेंज आज भी एक बहुत बड़ी चुनौती बनी हुई है। अब चीनी वैज्ञानिकों ने इस गंभीर समस्या का एक बेहद क्रांतिकारी समाधान खोजने का दावा किया है।

वैज्ञानिकों ने एक अनोखी सॉलिड-स्टेट बैटरी का आविष्कार किया है। यह बैटरी सिर्फ 3 मिनट में पूरी तरह चार्ज हो सकती है। दावा है कि यह तकनीक बेहद सुरक्षित है। यह वर्तमान में इस्तेमाल हो रही पारंपरिक बैटरियों से कई गुना ज्यादा पावरफुल भी है।

चाइनीज एकेडमी ऑफ साइंसेज के वैज्ञानिकों ने किया बड़ा आविष्कार

इस हाई-एनर्जी सॉलिड-स्टेट लिथियम-मेटल बैटरी को चाइनीज एकेडमी ऑफ साइंसेज के शोधकर्ताओं ने तैयार किया है। मशहूर जर्नल ऑफ द अमेरिकन केमिकल सोसाइटी में यह अहम रिसर्च प्रकाशित हुई है। यह तकनीक आने वाले समय में इलेक्ट्रिक कारों का पूरा भविष्य बदल देगी।

अभी बाजार में मौजूद ज्यादातर सॉलिड-स्टेट बैटरियों में पीवीडीएफ (PVDF) नामक पॉलीमर इलेक्ट्रोलाइट का इस्तेमाल किया जाता है। लेकिन फास्ट चार्जिंग के दौरान उनके अंदरूनी केमिकल्स आपस में क्रिया करके पूरी बैटरी को बहुत जल्दी खराब कर देते थे। जिससे लाइफ कम होती थी।

चीनी वैज्ञानिकों ने इस बड़ी तकनीकी खराबी का एक अचूक तोड़ निकाल लिया है। उन्होंने बैटरी के भीतर एक खास और मजबूत लिथियम फ्लोराइड की सुरक्षा परत बनाई है। यह परत अंदरूनी केमिकल्स को सुरक्षित रखती है। इससे बैटरी की लाइफ काफी बढ़ गई है।

कीलों से ठोकने पर भी नहीं हुआ कोई धमाका, सेफ्टी में नंबर वन

यह आधुनिक बैटरी 20C की तूफानी स्पीड से चार्ज होने की क्षमता रखती है। टेस्टिंग के दौरान लगातार 700 बार चार्ज और डिस्चार्ज करने के बाद भी इसकी 82 प्रतिशत क्षमता सुरक्षित रही। इसका साफ मतलब है कि यह लंबे समय तक टिकाऊ रहेगी।

इस नई बैटरी की एनर्जी डेंसिटी 451.5 Wh/kg है। वर्तमान में चलने वाली एलएफपी (LFP) बैटरियां केवल 200 Wh/kg की क्षमता देती हैं। यह नई बैटरी आकार में बहुत छोटी होने के बावजूद कारों को दोगुनी से भी ज्यादा लंबी रेंज देने में सक्षम है।

सुरक्षा के कड़े पैमानों पर भी यह बैटरी पूरी तरह खरी उतरी है। लैब टेस्टिंग के दौरान वैज्ञानिकों ने इस बैटरी के बीच में लोहे की कील ठोक दी थी। इसके बावजूद इसमें न तो कोई ब्लास्ट हुआ और न ही आग लगी। यह तकनीक पूरी तरह से सेफ है।

Author: Mohit

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