Bangladesh News: साल 1971 के उन काले दिनों को आज भी कोई भूल नहीं पाया है। बांग्लादेश ने एक बार फिर दुनिया की दहलीज पर इंसाफ की गुहार लगाई है। बांग्लादेशी नेतृत्व ने पाकिस्तान द्वारा किए गए उन भीषण अत्याचारों और नरसंहार के लिए वैश्विक न्याय की मांग की है। भारत इस मुश्किल घड़ी में अपने पड़ोसी देश के साथ मजबूती से खड़ा है। भारत सरकार ने स्पष्ट किया है कि वह पाकिस्तान द्वारा किए गए उन अमानवीय कृत्यों से पूरी तरह वाकिफ है। भारत ने अंतरराष्ट्रीय मंचों पर बांग्लादेश की इस जायज मांग का खुला समर्थन करने का भरोसा दिया है।
इतिहास के पन्नों में दफन वो खौफनाक दास्तां
आज से करीब पांच दशक पहले पाकिस्तान की सेना ने जो किया, वह मानवता पर एक गहरा धब्बा है। बांग्लादेश का आरोप है कि उस दौरान करीब 30 लाख निर्दोष लोगों की बेरहमी से हत्या कर दी गई थी। लाखों महिलाओं की अस्मत लूटी गई और करोड़ों लोगों को अपना घर छोड़कर भागना पड़ा। बांग्लादेश चाहता है कि दुनिया इस सामूहिक नरसंहार को आधिकारिक तौर पर मान्यता दे। संयुक्त राष्ट्र और अन्य अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं के सामने यह मुद्दा अब और जोर-शोर से उठाया जा रहा है।
भारत का अटूट समर्थन और अटूट दोस्ती
भारत ने हमेशा से बांग्लादेश की स्वतंत्रता और उसके संघर्ष का सम्मान किया है। भारतीय राजनयिकों ने हालिया बयानों में कहा है कि वे उन जख्मों को समझते हैं जो पाकिस्तान ने दिए थे। भारत का मानना है कि इतिहास के अपराधियों को उनके किए की सजा जरूर मिलनी चाहिए। भारत और बांग्लादेश के बीच यह सहयोग दक्षिण एशिया में न्याय और शांति की नई दिशा तय कर सकता है। दोनों देश मिलकर अब वैश्विक दबाव बनाने की रणनीति पर काम कर रहे हैं।
क्या पाकिस्तान कभी कबूल करेगा अपना गुनाह?
सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या पाकिस्तान अपनी पिछली गलतियों के लिए माफी मांगेगा? पाकिस्तान आज भी उन घटनाओं को पूरी तरह नकारने की कोशिश करता है। हालांकि, बांग्लादेश के पास उन अत्याचारों के पुख्ता सबूत और गवाह मौजूद हैं। अंतरराष्ट्रीय कानून के विशेषज्ञ मानते हैं कि अगर भारत और बांग्लादेश मिलकर दबाव बनाते हैं, तो पाकिस्तान को जवाबदेह ठहराया जा सकता है। यह केवल एक देश की मांग नहीं, बल्कि उन लाखों आत्माओं के लिए इंसाफ की पुकार है जिन्होंने आजादी की कीमत चुकाई।


