New York News: संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) की उच्च-स्तरीय बैठक में भारत ने इजरायल-फलस्तीन संघर्ष के शांतिपूर्ण समाधान के लिए अपनी वैश्विक प्रतिबद्धता को एक बार फिर मजबूती से दोहराया है। भारत ने गाजा में जारी गंभीर मानवीय संकट पर गहरी चिंता जताते हुए वहां तुरंत और स्थायी युद्धविराम की मांग की है।
संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी प्रतिनिधि राजदूत हरीश पर्वतनेनी ने बैठक को संबोधित करते हुए एक बड़ा एलान किया। उन्होंने कहा कि भारत जल्द ही संयुक्त राष्ट्र राहत और निर्माण एजेंसी (UNRWA) को 25 लाख डॉलर (लगभग 24 करोड़ रुपये) की वित्तीय सहायता सौंपेगा। यह राशि फलस्तीनी शरणार्थियों की मदद के लिए भारत के वार्षिक योगदान का हिस्सा है।
‘द्वि-राष्ट्र समाधान’ ही स्थायी शांति का एकमात्र रास्ता
राजदूत पर्वतनेनी ने वैश्विक मंच पर भारत का रुख स्पष्ट करते हुए कहा कि इस अशांत क्षेत्र में स्थायी शांति और समृद्धि का एकमात्र व्यावहारिक रास्ता ‘द्वि-राष्ट्र समाधान’ (Two-State Solution) ही है। भारत हमेशा से एक ऐसे संप्रभु, स्वतंत्र और व्यावहारिक फलस्तीन राष्ट्र का पुरजोर समर्थन करता आया है जो अपनी सीमाओं में सुरक्षित रहे।
उन्होंने आगे कहा कि ऐसा फलस्तीन राष्ट्र स्थापित होना चाहिए जो अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त सीमाओं के भीतर इजरायल के साथ पूरी तरह शांति और सौहार्द से रह सके। इसके साथ ही उन्होंने भारत की फलस्तीन के साथ दशकों पुरानी दीर्घकालिक विकास साझेदारी और आपसी सहयोग पर भी विशेष प्रकाश डाला।
फलस्तीन को मिलने वाले वार्षिक योगदान की पहली किस्त
राजदूत ने सहायता राशि का विवरण देते हुए कहा कि हम कुछ ही दिनों में यूएनआरडब्ल्यूए को 25 लाख अमेरिकी डॉलर सौंप देंगे। यह राशि फलस्तीनी शरणार्थियों के कल्याण के लिए दिए जाने वाले हमारे वार्षिक 50 लाख अमेरिकी डॉलर के कुल योगदान की पहली किस्त है। भारत लगातार फलस्तीनी नागरिकों की मानवीय मदद कर रहा है।
इजरायल-फलस्तीन विवाद के अलावा, इस महत्वपूर्ण बैठक में भारत ने लेबनान के मौजूदा संकट और सुरक्षा हालातों पर भी अपनी चिंता व्यक्त की। भारत ने वैश्विक मंच से लेबनान की क्षेत्रीय अखंडता, सीमाओं की सुरक्षा और संप्रभुता का पूरी तरह से सम्मान करने की पुरजोर अपील की है।
लेबनान संप्रभुता और प्रस्ताव 1701 को लागू करने पर जोर
लेबनान के संवेदनशील मुद्दे पर भारत ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के ऐतिहासिक प्रस्ताव 1701 को पूरी तरह लागू करने की आवश्यकता पर बल दिया। इसके साथ ही उन्होंने नवंबर 2024 में जारी की गई शत्रुता समाप्ति की आधिकारिक घोषणा को भी जमीनी स्तर पर प्रभावी ढंग से लागू करने की मांग की।
राजदूत हरीश परवथानेनी ने लेबनान में संयुक्त राष्ट्र अंतरिम बल (UNIFIL) के तहत तैनात भारतीय शांति सैनिकों की महत्वपूर्ण और साहसिक भूमिका की जमकर सराहना की। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से इन विपरीत परिस्थितियों में वहां मुस्तैदी से सेवारत भारतीय जवानों की सुरक्षा और संरक्षा सुनिश्चित करने की बेहद महत्वपूर्ण मांग भी उठाई।
Author: Pallavi Sharma


