Washington News: अमेरिका ध्वनि की गति से भी तेज उड़ान भरने वाले ‘सुपरसोनिक’ वाणिज्यिक विमानों पर लगे पांच दशक पुराने प्रतिबंध को हटाने की दिशा में बड़ा कदम उठा रहा है। इसके लिए अमेरिकी प्रशासन ने ध्वनि-आधारित नए कड़े मानकों का एक प्रस्ताव पेश किया है।
नासा के आधुनिक एक्स-59 विमान के परीक्षण से खुला रास्ता
अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा द्वारा अपने अत्याधुनिक प्रायोगिक ‘एक्स-59’ विमान का सफल परीक्षण किए जाने के बाद यह नई पहल शुरू हुई है। नासा के इस विशेष विमान ने बिना किसी तेज ध्वनि विस्फोट (सोनिक बूम) के ध्वनि की गति से भी तेज उड़ान भरने का सफल प्रदर्शन किया।
आमतौर पर जब भी कोई विमान सुपरसोनिक रफ्तार से उड़ता है, तो बहुत तेज धमाका होता है। इस भयंकर आवाज से रिहायशी इमारतों और अन्य शहरी संरचनाओं को गंभीर नुकसान पहुंचने की आशंका रहती है। इसी खतरे को देखते हुए इन उड़ानों पर सालों से पाबंदी लागू थी।
साल 1973 से लागू ऐतिहासिक प्रतिबंध को बदलने की तैयारी
अमेरिका के संघीय विमानन प्रशासन (एफएए) के इस नए प्रस्तावित नियम का मुख्य उद्देश्य वर्ष 1973 से घरेलू उड़ानों पर लगे प्रतिबंध को पूरी तरह समाप्त करना है। इसके स्थान पर सरकार अब ध्वनि की एक अधिकतम सीमा तय करके नया नियम लागू करना चाहती है।
प्रस्ताव के अनुसार अब विमानों को जमीन के ऊपर मैक-1 यानी ध्वनि की गति (करीब 767 मील प्रति घंटा) से अधिक रफ्तार से उड़ने की इजाजत मिलेगी। हालांकि इसके लिए विमान कंपनियों को यह साबित करना होगा कि उनकी उड़ान से होने वाला शोर तय सीमा के भीतर है।
साल 2027 के मध्य तक अंतिम रूप ले सकते हैं नए नियम
एफएए इस वर्ष के अंत तक बाजार में एक और पूरक नियम प्रस्तावित करने की योजना बना रहा है। इस आगामी ड्राफ्ट में सुपरसोनिक विमानों के हवाई अड्डों से उड़ान भरने (टेक-ऑफ) और उतरने (लैंडिंग) के दौरान पैदा होने वाले शोर के कड़े मानक तय किए जाएंगे।
वैश्विक विमानन क्षेत्र के विशेषज्ञों के मुताबिक इन दोनों महत्वपूर्ण नियमों को वर्ष 2027 के मध्य तक अंतिम रूप देकर लागू किया जा सकता है। इस ऐतिहासिक कानूनी बदलाव के बाद दुनिया भर में सुपरसोनिक कमर्शियल उड़ानों के एक नए युग की शुरुआत होना बिल्कुल तय माना जा रहा है।

