International News: क्यूबा इन दिनों कुदरती आफत और कड़े आर्थिक प्रतिबंधों की दोहरी मार झेल रहा है। पिछले साल आए भीषण चक्रवात मेलिसा ने पूरे देश में भारी तबाही मचाई थी। इस आपदा से हजारों नागरिक अब तक पूरी तरह उबर नहीं पाए हैं। इसके साथ ही अमेरिकी पाबंदियों ने वहां ईंधन का गंभीर संकट खड़ा कर दिया है।
देश में हालात इतने बदतर हो चुके हैं कि सड़कों पर गाड़ियां चलाने के लिए पेट्रोल और डीजल उपलब्ध नहीं है। प्रभावित इलाकों में राहत सामग्री पहुंचाने के लिए वालंटियर्स ट्रकों की जगह बैलगाड़ियों का सहारा ले रहे हैं। अमेरिकी प्रतिबंधों के कारण ट्रांसपोर्ट सिस्टम पूरी तरह ठप हो गया है।
अमेरिकी पाबंदियों के बीच आई मदद ने खड़ा किया बड़ा विरोधाभास
इस पूरे संकट के बीच एक बड़ी विडंबना सामने आई है। जिस अमेरिका ने क्यूबा पर सख्त पाबंदियां लगाई हैं, वही अब मानवीय सहायता भेज रहा है। यह राहत सामग्री एक कैथोलिक एनजीओ कारिटास के जरिए प्रभावित लोगों तक पहुंचाई जा रही है। इस पैकेज में राशन और जरूरी दवाइयां शामिल हैं।
राहत पैकेट के जरिए पीड़ितों को कुकिंग ऑयल, चावल, बीन्स, साबुन और टूथब्रश दिए जा रहे हैं। हालांकि स्थानीय लोग और एक्सपर्ट्स इस अमेरिकी नीति पर लगातार सवाल उठा रहे हैं। उनका कहना है कि जब कड़े प्रतिबंधों से देश की कमर टूट रही है, तो सिर्फ मुफ्त राशन देना स्थायी समाधान नहीं है।
हाथों से ट्राईसाइकिल चलाने वाले पीड़ित ने बयां किया अपना दर्द
सैंटियागो डे क्यूबा के रहने वाले तियोदार्दो देबार्देत की आपबीती वहां के जमीनी हालात बयां करती है। एक हादसे में अपने दोनों पैर गंवा चुके तियोदार्दो हाथों से ट्राईसाइकिल चलाकर अपना गुजारा करते हैं। चक्रवात ने उनके घर की छत और शौचालय को पूरी तरह नष्ट कर दिया था।
तियोदार्दो को अमेरिकी राहत सामग्री मिलने से कुछ मदद तो मिली है, लेकिन उनके इलाके में बिजली और साफ पानी का संकट जस का तस बना हुआ है। उनकी यह दर्दनाक कहानी क्यूबा के उन हजारों परिवारों की वास्तविक स्थिति को दिखाती है, जो आज भी बुनियादी सुविधाओं के लिए तरस रहे हैं।
क्यूबा की मदद के लिए संयुक्त राष्ट्र, यूरोपीय संघ, चीन, वेनेजुएला और मैक्सिको जैसी वैश्विक शक्तियों ने भी हाथ बढ़ाया है। अमेरिका ने अतिरिक्त 100 मिलियन डॉलर की आर्थिक सहायता देने का ऑफर दिया है। लेकिन राष्ट्रपति मिगुएल डियाज-कैनेल ने स्पष्ट किया कि जब तक व्यापारिक पाबंदियां नहीं हटेंगी, तब तक संकट खत्म नहीं होगा।
Author: Pallavi Sharma

