ड्रैगन को लगा ‘240 वोल्ट’ का झटका, चीन की अर्थव्यवस्था में भारी गिरावट, 3 साल में पहली बार हुआ ऐसा!

Business News: भारत के पड़ोसी देश चीन की अर्थव्यवस्था को एक बहुत बड़ा और अप्रत्याशित झटका लगा है। दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था माने जाने वाले चीन में मई 2026 के दौरान रिटेल सेल्स (खुदरा बिक्री) में एक ऐसी भारी गिरावट दर्ज की गई है, जो पिछले तीन साल में पहली बार देखने को मिली है।

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दिसंबर 2022 के बाद पहली बार घटी खुदरा बिक्री

अंतरराष्ट्रीय न्यूज एजेंसी रॉयटर्स द्वारा जारी आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, मई महीने में चीन की रिटेल सेल्स सालाना आधार पर 0.6 प्रतिशत तक घट गई है। दिसंबर 2022 के बाद यह पहला मौका है जब चीन की रिटेल बिक्री में इस तरह की सीधे गिरावट दर्ज की गई है।

इस गिरावट का सबसे बड़ा कारण यह है कि चीन के आम लोग अब बाजार में पैसे खर्च करने से लगातार बच रहे हैं। इसके चलते वहां की घरेलू मांग बेहद कमजोर पड़ गई है। रिटेल सेक्टर की यह मंदी ड्रैगन की आर्थिक सेहत के लिए ‘240 वोल्ट’ के तगड़े झटके की तरह देखी जा रही है।

सिर्फ रिटेल ही नहीं, निवेश के मोर्चे पर भी लगा झटका

चीन की सिर्फ रिटेल सेल ही नहीं गिरी है, बल्कि बड़े निवेश के मोर्चे पर भी ड्रैगन को भारी निराशा हाथ लगी है। चालू वर्ष में जनवरी से मई 2026 के बीच फिक्स्ड एसेट इन्वेस्टमेंट में 4.1 प्रतिशत की बड़ी गिरावट दर्ज की गई है, जिसने सरकार की चिंता बढ़ा दी है।

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इससे पहले जनवरी से अप्रैल की अवधि में यह गिरावट केवल 1.6 प्रतिशत थी, जो अब बढ़कर 4.1 प्रतिशत हो गई है। आर्थिक विशेषज्ञों का मानना है कि चीन के रियल एस्टेट सेक्टर में लंबे समय से चल रही भयंकर कमजोरी का सीधा असर अब उसके पूरे आर्थिक तंत्र पर साफ दिखाई दे रहा है।

कंपनियां नए प्रोजेक्ट्स में पैसा लगाने से कतरा रहीं

बाजार के मौजूदा हालातों को देखते हुए कई बड़ी कंपनियां अब नए प्रोजेक्ट्स में निवेश करने से पूरी तरह बच रही हैं। इससे देश की तमाम आर्थिक गतिविधियां बुरी तरह प्रभावित हो रही हैं। विश्लेषकों का कहना है कि उपभोक्ता अपने भविष्य को लेकर बेहद डरे और सतर्क हैं।

यही वजह है कि लोग अब कार जैसी बड़ी और महंगी चीजों की खरीदारी से दूरी बना रहे हैं, जिससे ऑटोमोबाइल सेक्टर को भी नुकसान हो रहा है। चीन में मई के दौरान मनाए गए पांच दिवसीय लेबर डे अवकाश जैसे बड़े त्योहार पर भी लोगों ने उम्मीद के मुताबिक खर्च नहीं किया।

सरकार द्वारा बाजार में तेजी लाने के लिए चलाए गए कई उपभोक्ता वस्तु प्रोत्साहन कार्यक्रमों का असर भी अब धीरे-धीरे पूरी तरह खत्म होता दिख रहा है। शंघाई के एक बड़े बार संचालक के मुताबिक, कॉर्पोरेट आयोजनों पर खर्च घटने से उनका मुनाफा आधा रह गया है।

औद्योगिक उत्पादन से मिली चीन को थोड़ी राहत

इन तमाम आर्थिक मुश्किलों के बीच चीन के लिए कुछ मोर्चों से राहत की खबर भी आई है। देश के औद्योगिक उत्पादन में मई के दौरान 4.5 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई है, जो अप्रैल महीने के 4.1 प्रतिशत के मुकाबले थोड़ी बेहतर स्थिति में है।

इस आंकड़े से यह संकेत मिलता है कि चीन का विनिर्माण (मैन्युफैक्चरिंग) क्षेत्र अभी भी अपेक्षाकृत मजबूत बना हुआ है। विशेष रूप से हाई-टेक मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर ने इस मंदी में भी काफी अच्छा प्रदर्शन किया है, जिससे चीन को वैश्विक स्तर पर कुछ सहारा मिला है।

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस सेक्टर में आया उछाल

दुनिया भर में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और उससे जुड़े आधुनिक उत्पादों की वैश्विक मांग तेजी से बढ़ने के कारण चीन के तकनीकी उद्योग को तगड़ा फायदा मिला है। आंकड़ों के अनुसार, मई में हाई-टेक मैन्युफैक्चरिंग उत्पादन में 15.1 प्रतिशत की बंपर बढ़त दर्ज की गई है।

वर्तमान में चीन की अर्थव्यवस्था इस समय दो बिल्कुल अलग-अलग तस्वीरें दिखा रही है। एक तरफ जहां फैक्ट्रियां और निर्यात बेहतर प्रदर्शन कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर घरेलू मांग, निवेश और उपभोक्ता खर्च लगातार कमजोर हो रहे हैं। विशेषज्ञों के मुताबिक सरकार को जल्द ही नए कदम उठाने होंगे।

Author: Rajesh Kumar

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