Dehradun News: उत्तराखंड की राजनीति में शुचिता, अनुशासन और प्रशासनिक दक्षता का दूसरा नाम मेजर जनरल भुवनचंद्र खंडूड़ी (सेवानिवृत्त) है। एक सैन्य पृष्ठभूमि से आने वाले जनरल खंडूड़ी ने न केवल भारतीय सेना में देश की सेवा की, बल्कि सक्रिय राजनीति में आकर भी भाजपा के एक भरोसेमंद ‘ब्रांड’ के रूप में अपनी अमिट छाप छोड़ी। उनके राजनीतिक जीवन का हर पड़ाव संघर्ष और नेतृत्व क्षमता की एक नई गाथा लिखता है।
वर्ष 1991 में पौड़ी गढ़वाल संसदीय सीट से चुनावी सफर शुरू करने वाले खंडूड़ी ने कुल पांच बार इस सीट का प्रतिनिधित्व किया। उनके काम करने की अनूठी शैली और बेबाक अंदाज ने उन्हें पार्टी के भीतर हमेशा एक विश्वसनीय चेहरा बनाए रखा। चाहे कठिन दौर हो या नेतृत्व का संकट, भाजपा की कमान सौंपने के लिए पार्टी की नजरें हमेशा उन्हीं पर टिकती थीं।
जन लोकपाल और प्रशासनिक सुधारों के अग्रदूत
जनरल खंडूड़ी का मुख्यमंत्री के रूप में कार्यकाल कई ऐतिहासिक निर्णयों के लिए जाना जाता है। जब देश भर में जन लोकपाल बिल की मांग उठ रही थी, तब उत्तराखंड देश का पहला राज्य बना जिसने खंडूड़ी की दृढ़ इच्छाशक्ति के कारण सशक्त लोकायुक्त कानून पारित किया। यह उनके भ्रष्टाचार मुक्त शासन के प्रति समर्पण का सबसे बड़ा प्रमाण था।
उन्हें पहली बार 2007 में मुख्यमंत्री बनाया गया, लेकिन आंतरिक गुटबाजी के चलते 2009 में उन्हें पद छोड़ना पड़ा। फिर भी, पार्टी उनकी स्वच्छ छवि से लंबे समय तक दूर नहीं रह पाई। 2012 के विधानसभा चुनाव से ठीक पहले उन्हें फिर से कमान दी गई और चुनाव ‘खंडूड़ी हैं जरूरी’ के नारे के इर्द-गिर्द लड़ा गया। हालांकि वे स्वयं कोटद्वार सीट से मामूली अंतर से हार गए, लेकिन उनका राजनीतिक कद कम नहीं हुआ।
राजनीतिक विरासत और वर्तमान परिदृश्य
2014 के लोकसभा चुनाव में पौड़ी गढ़वाल सीट से प्रचंड जीत दर्ज कर उन्होंने एक बार फिर अपनी लोकप्रियता सिद्ध कर दी। दिलचस्प बात यह रही कि जिस कोटद्वार विधानसभा सीट से वे चुनाव हारे थे, उसी क्षेत्र ने उन्हें लोकसभा चुनाव में भारी मत देकर अपना समर्थन दिया। यह उनके प्रति जनता के अटूट विश्वास का प्रमाण था।
वर्ष 2019 के बाद बढ़ती उम्र के कारण उन्होंने सक्रिय राजनीति से किनारा कर लिया। आज उनकी राजनीतिक विरासत उनकी पुत्री ऋतु खंडूड़ी भूषण बखूबी संभाल रही हैं। कोटद्वार से विधायक और वर्तमान में उत्तराखंड विधानसभा की अध्यक्ष के रूप में ऋतु खंडूड़ी अपने पिता की प्रशासनिक विरासत को आगे बढ़ा रही हैं। जनरल खंडूड़ी का जीवन आज भी उत्तराखंड के युवाओं और राजनेताओं के लिए अनुशासन और जनसेवा का एक उत्कृष्ट उदाहरण है।
Author: Harish Rawat


