Uttarakhand News: उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा की छोटी बहन और भारतीय जनता पार्टी की वरिष्ठ नेता रीता बहुगुणा जोशी के पति पूरन चंद्र जोशी की अस्थियां सोमवार को हरिद्वार के वीआईपी घाट पर गंगा नदी में वैदिक विधि-विधान के साथ विसर्जित कर दी गईं। इस दौरान वहां मौजूद सभी लोगों की आंखें पूरी तरह नम हो गईं।
गंगा घाट पर बेटे मयंक जोशी ने पूरे किए धार्मिक नियम
रीता बहुगुणा जोशी के सुपुत्र मयंक जोशी ने अस्थि विसर्जन की इस बेहद महत्वपूर्ण धार्मिक क्रिया को संपन्न कराया। उन्होंने बेहद भावुक होकर अपने पूज्य पिता की अस्थियों को मां गंगा की पवित्र लहरों में प्रवाहित किया। पारिवारिक पुरोहित उज्ज्वल पंडित ने इस पूरी वैदिक विसर्जन प्रक्रिया को धार्मिक रीति-रिवाजों के साथ पूरा करवाया।
पूरन चंद्र जोशी का पिछले दिनों लंबी बीमारी से जूझने के बाद अचानक निधन हो गया था। इस भावुक मौके पर परिवार के कई बेहद करीबी लोग और रिश्तेदार बड़ी संख्या में घाट पर मौजूद रहे। उन सभी लोगों ने दिवंगत आत्मा की परम शांति के लिए ईश्वर से हाथ जोड़कर विशेष प्रार्थना की।
लंबी बीमारी के बाद लखनऊ के अस्पताल में लिया अंतिम सांस
भाजपा की पूर्व सांसद प्रोफेसर रीता बहुगुणा जोशी के पति पीसी जोशी ने 4 मई 2026 की सुबह करीब 7 बजे लखनऊ के प्रसिद्ध एसजीपीजीआई अस्पताल में अंतिम सांस ली थी। वे 79 वर्ष के थे और काफी लंबे समय से गंभीर रूप से बीमार चल रहे थे। ब्रेन स्ट्रोक आने से अचानक उनकी तबीयत बिगड़ गई थी।
पेशे से मैकेनिकल इंजीनियर पीसी जोशी ने तकनीकी और लॉजिस्टिक्स के क्षेत्र में कई वर्षों तक बेहतरीन कार्य किया था। वे टीएसएल कंपनी में वरिष्ठ अधिकारी के पद से गरिमा के साथ सेवानिवृत्त हुए थे। उनका अंतिम संस्कार 5 मई 2026 को उत्तर प्रदेश के पवित्र शहर प्रयागराज में पूरे सम्मान से हुआ था।
अंतिम विदाई में शामिल हुए राजनीति और समाज के बड़े चेहरे
इस दुखद अवसर पर जयराम आश्रम के पूज्य अध्यक्ष ब्रह्मस्वरूप ब्रह्मचारी और भारत माता मंदिर के महंत ललितानंद गिरी महाराज उपस्थित रहे। इनके साथ ही रीता जोशी बहुगुणा, पूर्व मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा, साकेत बहुगुणा और उत्तराखंड सरकार के कैबिनेट मंत्री सौरभ बहुगुणा ने भी अपनी श्रद्धांजलि अर्पित की।
उनके अलावा रीता जोशी के छोटे भाई शेखर बहुगुणा, कैबिनेट मंत्री सुबोध उनियाल और मदन कौशिक सहित कई दिग्गज नेता वहां मौजूद रहे। राजनीति से अलग विभिन्न सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधि, जाने-माने शिक्षाविद और अन्य तमाम क्षेत्रों के गणमान्य लोग भी इस अंतिम विदाई कार्यक्रम में शामिल होने पहुंचे थे।
Author: Harish Rawat

