Mumbai News: भारतीय शेयर बाजार में आईटी (IT) सेक्टर की कंपनियों में लगातार गिरावट का दौर जारी है। पूरे सप्ताह भारी बिकवाली के दबाव के कारण निवेशकों को भारी नुकसान उठाना पड़ा है। शुरुआती उतार-चढ़ाव के बाद बाजार संभला जरूर, लेकिन निफ्टी आईटी इंडेक्स सबसे बड़ा लूजर साबित हुआ।
वैश्विक तकनीकी बाजार में छाई मंदी और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) को लेकर बढ़ती चिंताओं ने घरेलू आईटी क्षेत्र की कमर तोड़ दी है। इससे बाजार में निवेशकों का भरोसा पूरी तरह डगमगा गया है। जानकारों के मुताबिक वैश्विक मंदी का यह असर अभी कुछ समय तक जारी रह सकता है।
दिग्गज आईटी कंपनियों के शेयर दो प्रतिशत से ज्यादा टूटे
कारोबार के अंत में निफ्टी आईटी इंडेक्स करीब 1.62% की गिरावट के साथ 27,821 के स्तर पर बंद हुआ। इस मंदी के दौरान एलटीएम (LTM), इंफोसिस (Infosys) और एचसीएल टेक (HCL Tech) जैसी दिग्गज कंपनियों के शेयर दो फीसदी से अधिक टूट गए।
इसके साथ ही टीसीएस (TCS) और विप्रो (Wipro) जैसी बड़ी आईटी कंपनियों में भी भारी कमजोरी देखी गई। मिडकैप सेगमेंट की टेक कंपनियों जैसे परसिस्टेंट सिस्टम्स (Persistent Systems) और कोफर्ज (Coforge) में भी तेज गिरावट आई। इससे साफ है कि मंदी का यह दबाव पूरे आईटी सेक्टर में फैल चुका है।
एन्थ्रोपिक के नए एआई मॉडल क्लाउड फेबल 5 का डर
मार्केट एक्सपर्ट्स के मुताबिक इस बड़ी गिरावट के पीछे एन्थ्रोपिक (Anthropic) कंपनी का नया एआई मॉडल ‘क्लाउड फेबल 5’ (Claude Fable 5) है। कंपनी का दावा है कि यह नया मॉडल सॉफ्टवेयर इंजीनियरिंग और नॉलेज वर्क से जुड़े कामों को पूरी तरह ऑटोमेट यानी स्वचालित कर सकता है।
इस बड़े तकनीकी दावे की वजह से शेयर बाजार के निवेशकों में गहरा डर बैठ गया है। उन्हें आशंका है कि जनरेटिव एआई (Generative AI) भविष्य में आईटी सर्विसेज इंडस्ट्री के पारंपरिक कामकाज को खत्म कर देगा। इससे भारतीय कंपनियों का पुराना रेवेन्यू मॉडल पूरी तरह प्रभावित हो सकता है।
ब्रोकरेज फर्म एचएसबीसी ने दी लंबी मंदी की बड़ी चेतावनी
ग्लोबल ब्रोकरेज फर्म एचएसबीसी (HSBC) ने अपनी ताजा रिपोर्ट में भारतीय आईटी सेक्टर को लेकर एक बड़ी चेतावनी जारी की है। रिपोर्ट के अनुसार आने वाले अगले 8 से 9 तिमाहियों तक आईटी कंपनियों के शेयरों पर बिकवाली का यह कड़ा दबाव लगातार बना रह सकता है।
एआई से जुड़ी अनिश्चितताएं और बढ़ती वैश्विक एमएंडए (M&A) एक्टिविटी आईटी सेक्टर के वैल्यूएशन को बहुत नीचे ला सकती हैं। इसके कारण कंपनियों का वैल्यूएशन घटकर कमाई के मुकाबले महज 13 से 14 गुना तक सिमटने की आशंका है, जिससे घरेलू टेक बाजार में हलचल मची हुई है।
कुल मिलाकर भारतीय टेक उद्योग इस समय वैश्विक तकनीकी मंदी और एआई के बढ़ते प्रभाव की दोहरी मार झेल रहा है। अब निवेशकों की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि क्या यह मंदी अस्थायी है या एआई हमेशा के लिए आईटी कंपनियों के बिजनेस मॉडल को बदल देगा।
Author: Rajesh Kumar


