Uttar Pradesh News: उत्तर प्रदेश आतंकवाद निरोधक दस्ते (यूपी एटीएस) ने देश को दहलाने की एक बड़ी साजिश को नाकाम कर दिया है। दिल्ली और पंजाब के भाजपा कार्यालयों, अस्पतालों, स्कूलों और एक बड़े उद्योगपति की रेकी करने का खतरनाक ब्लूप्रिंट नोएडा में तैयार हुआ था। एटीएस ने इस मामले में दो अलग-अलग ऑपरेशनों में कुल छह स्लीपर सेल को गिरफ्तार किया है। इस खुलासे के बाद दिल्ली-एनसीआर समेत पूरे देश की सुरक्षा एजेंसियां अलर्ट पर हैं।
शहजाद भट्टी और आबिद जट्ट गिरोह से जुड़े थे आरोपी
एटीएस की पूछताछ में पकड़े गए आरोपियों ने बेहद चौंकाने वाले राज उगले हैं। ये सभी आरोपी इंटरनेट मीडिया के जरिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सक्रिय शहजाद भट्टी और आबिद जट्ट गिरोह से सीधे जुड़े थे। ये स्लीपर सेल भारत में रहकर इस नेटवर्क के लिए विभिन्न महत्वपूर्ण स्थानों की रेकी कर रहे थे। ये देश के भीतर एक बड़ा और मजबूत नेटवर्क तैयार कर रहे थे ताकि किसी बड़ी और विनाशकारी आतंकी घटना को आसानी से अंजाम दिया जा सके।
ड्रोन के रास्ते पंजाब सीमा से आने थे खतरनाक हथियार
सुरक्षा एजेंसी की गहन जांच में यह साफ हुआ है कि ड्रोन के माध्यम से पंजाब के रास्ते देश की सीमा के भीतर हथियारों की सप्लाई होनी थी। आतंकियों ने इन स्लीपर सेल को टास्क दिया था। रेकी करने का काम पूरा होते ही इन आरोपियों को भारी मात्रा में विस्फोटक पदार्थ और अत्याधुनिक हथियार मिलने वाले थे। इसी रणनीति को अंतिम रूप देने के लिए नोएडा में एक बेहद गुप्त बैठक आयोजित की गई थी, जिसकी भनक एटीएस को लग गई।
नोएडा और सहारनपुर से ऐसे दबोचे गए सभी संदिग्ध
एटीएस की टीम ने पुख्ता सूचना के आधार पर सबसे पहले कार्रवाई की। टीम ने 23 अप्रैल को नोएडा के सेक्टर 126 थाना क्षेत्र से मेरठ के तुषार चौहान और बागपत के समीर खान को गिरफ्तार किया। हालांकि इनके पास से कोई हथियार नहीं मिला। इसके बाद इनकी निशानदेही पर मोबाइल डेटा खंगाला गया। इस सुराग के आधार पर एटीएस ने 27 मई को सहारनपुर से महकाब, शाहरुख, गगनदीप उर्फ गुर और मुर्शरफ को भी दबोच लिया।
पश्चिमी उत्तर प्रदेश में जल्द होगी और भी गिरफ्तारियां
अधिकारियों के अनुसार एटीएस ने इन सभी छह स्लीपर सेल को हथियारों की खेप मिलने और किसी बड़ी वारदात को अंजाम देने से ठीक पहले ही दबोच लिया। एटीएस की टीम ने अब इन सभी पकड़े गए आरोपियों की विस्तृत रिपोर्ट तैयार कर ली है। इस रिपोर्ट को आगे की कार्रवाई के लिए लखनऊ मुख्यालय भेज दिया गया है। खुफिया विभाग अब पश्चिमी उत्तर प्रदेश में सक्रिय इस नेटवर्क के अन्य स्लीपर सेल की पहचान कर रहा है।


