Anapur Veterinary Hospital: आनापुर सरकारी पशु अस्पताल बना कबाड़खाना, डॉक्टरों के आवास में बाहरी व्यक्ति का अवैध कब्जा

Uttar Pradesh News: प्रयागराज के शृंगवेरपुर धाम अंतर्गत आनापुर का राजकीय पशु चिकित्सालय इन दिनों बदहाली का शिकार है। मूक पशुओं के इलाज के लिए बना यह सरकारी अस्पताल खुद अपनी दुर्दशा पर आंसू बहा रहा है। अस्पताल परिसर में चारों तरफ गंदगी और अव्यवस्थाओं का बोलबाला देखने को मिल रहा है।

अस्पताल कैंपस में जगह-जगह कूड़े के ऊंचे ढेर लगे हैं। इस भीषण गंदगी के कारण क्षेत्र में संक्रामक बीमारियां फैलने का बड़ा खतरा बना हुआ है। अस्पताल के चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी राधेश्याम शुक्ला ने बताया कि परिसर का सरकारी हैंडपंप भी महीनों से पूरी तरह खराब पड़ा हुआ है।

खराब हैंडपंप से बूंद-बूंद पानी को तरस रहे लोग

भीषण गर्मी के इस मौसम में पानी की समस्या सबसे बड़ी चुनौती बन गई है। अस्पताल आने वाले लाचार पशुपालकों, डॉक्टरों और स्टाफ को पीने के पानी के लिए बाहर भागना पड़ता है। स्थानीय ग्रामीणों ने कई बार इसकी लिखित शिकायत बड़े अधिकारियों से की, लेकिन कोई ऐक्शन नहीं हुआ।

अस्पताल परिसर का बुनियादी ढांचा तो पूरी तरह चरमरा ही चुका है। इसके साथ ही वहां प्रशासनिक लापरवाही का एक बहुत बड़ा और हैरान करने वाला मामला भी सामने आया है। अस्पताल परिसर के भीतर बने स्टाफ डॉक्टरों के सरकारी आवासों का सरेआम गलत इस्तेमाल किया जा रहा है।

डॉक्टर के स्टाफ क्वार्टर पर बाहरी व्यक्ति का कब्जा

सरकारी नियमों को ताक पर रखकर इन सरकारी आवासों में एक बाहरी व्यक्ति वर्षों से सपरिवार रह रहा है। मूल रूप से प्रतापगढ़ के रसूलपुर निवासी दुखीराम विश्वकर्मा ने इस क्वार्टर पर अवैध कब्जा जमा रखा है। वह यहां रहकर आराम से अपना बढ़ई का प्राइवेट बिजनेस चला रहे हैं।

अवैध रूप से रह रहे दुखीराम ने बताया कि पूर्व पशु चिकित्सा अधिकारी विनोद कुमार विश्वकर्मा ने उन्हें यहां रहने की मौखिक परमिशन दी थी। बेटों द्वारा घर से निकाले जाने के बाद वह इस सरकारी बिल्डिंग को ही अपना परमानेंट ठिकाना बनाकर बढ़ई का काम करने लगे।

हाई-सिक्योरिटी वाले इस सरकारी परिसर में किसी अज्ञात बाहरी नागरिक का वर्षों तक बिना रोकटोक रहना बड़ी सुरक्षा चूक है। यह पूरी घटना जिला प्रशासन की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े करती है। अस्पताल की देखरेख और नियमित मेंटेनेंस न होने से पूरी सरकारी बिल्डिंग जर्जर हो रही है।

क्षेत्र के परेशान पशुपालकों और किसानों ने अब इस पूरे मामले में सख्त रुख अपनाया है। उन्होंने जिला मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी से अस्पताल की तुरंत सफाई कराने की मांग की है। इसके साथ ही अवैध कब्जे की जांच कर दोषी अधिकारियों के खिलाफ सख्त विभागीय कार्रवाई की मांग की है।

Author: Ajay Mishra

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