Pratapgarh News: उत्तर प्रदेश के प्रतापगढ़ में पिछले मंगलवार को आए भीषण आंधी-तूफान के बाद मची तबाही से बिजली व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई है। जिले के आधा दर्जन गांवों में छठवें दिन भी आपूर्ति बहाल नहीं हो सकी है। इसके चलते हजारों ग्रामीण भीषण गर्मी के बीच घने अंधेरे में रातें गुजारने को मजबूर हैं।
मोबाइल की रोशनी में फाल्ट ठीक करने में जुटे रहे कर्मचारी
इस प्राकृतिक आपदा के कारण संडवा चंद्रिका और अंतू विद्युत उपकेंद्र के अंतर्गत आने वाले सैकड़ों बिजली के खंभे उखड़कर जमीन पर गिर गए थे। तूफान से 11 हजार वोल्ट की एचटी लाइन और कई भारी ट्रांसफार्मर पूरी तरह डैमेज हो गए थे। इससे क्षेत्र के लगभग पचास गांवों की बत्ती पूरी तरह गुल हो गई थी।
बाधित हुई सप्लाई को दोबारा चालू करने के लिए बिजली विभाग के जेई और लाइनमैन लगातार कड़ी मेहनत कर रहे हैं। कर्मचारी सुबह से लेकर रात 11 बजे तक मोबाइल की फ्लैश लाइट जलाकर टेक्निकल फाल्ट ठीक करने में जुटे रहे। इस संकट की घड़ी में स्थानीय उपभोक्ताओं ने भी टीम का पूरा साथ दिया।
ग्रामीणों ने खुद खोदे गड्ढे और रस्से से खींचे बिजली के तार
परेशान ग्रामीणों ने खुद चिलबिला स्टोर से जरूरी सामान लाने, नए खंभे खड़े करने के लिए गड्ढे खोदने और भारी तारों को रस्से से खींचने में मदद की। इसके बाद भी अंतू सबस्टेशन से जुड़े नागमलपुर, मठिया और बिराहिमपुर गांवों में लोग बिना लाइट और पानी की किल्लत से बुरी तरह बेहाल नजर आए।
इसी तरह संडवा चंद्रिका फीडर के बझान, तिवारीपुर, कोलबजरडीह, रायचंद्रपुर और नरी गांवों में छह दिनों से ब्लैकआउट की स्थिति बनी हुई है। प्रशासन ने दूसरे चालू फीडर से जोड़कर बिजली देने का एक वैकल्पिक प्रयास किया था। हालांकि, अचानक ओवरलोड बढ़ जाने की वजह से वह तरकीब भी पूरी तरह फेल हो गई।
लगातार रतजगा करने की वजह से अब ग्रामीणों का सब्र पूरी तरह जवाब दे रहा है और उनमें भारी आक्रोश पनप रहा है। कोलबजरडीह की प्रधान अनीता बसंत सिंह और रायचंद्रपुर के प्रधान दीपक सिंह ने बताया कि समस्या दूर न होने से रोष है। अंतू के अवर अभियंता गोविंद विश्वकर्मा के मुताबिक आज रात तक स्थिति सुधर जाएगी।
Author: Manish Rathore


