हिमाचल में दलबदलुओं का खेल खत्म! सुक्खू सरकार ने छीनी उम्रभर की पेंशन, जानें किन विधायकों पर गिरी गाज

Himachal News: हिमाचल प्रदेश विधानसभा ने दलबदल करने वाले विधायकों को बड़ा झटका दिया है। राज्य सरकार ने 2 अप्रैल को एक अहम विधेयक पारित कर दिया है। अब दल-बदल विरोधी कानून के तहत अयोग्य ठहराए गए विधायकों को जीवन भर पेंशन नहीं मिलेगी। यह फैसला विधानसभा में ध्वनि मत से पास हो गया। मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने इसे लोकतंत्र और जनादेश का सम्मान बताया है। वहीं, विपक्षी दल भाजपा ने इस नए कानून का कड़ा विरोध किया है।

बागी विधायकों पर पड़ेगा सीधा असर

इस नए कानून का सीधा असर कांग्रेस के उन बागी विधायकों पर पड़ेगा जिन्हें अयोग्य घोषित किया गया था। पहली बार विधायक बने चैतन्य शर्मा और देवेंद्र भुट्टो को अब पेंशन का लाभ नहीं मिलेगा। इसके अलावा, उपचुनाव हार चुके रवि ठाकुर और राजिंदर राणा भी पेंशन के हकदार नहीं रहेंगे। हालांकि, सुधीर शर्मा और इंदर दत्त लखनपाल फिर से चुनाव जीत गए हैं। इसलिए इन दोनों नेताओं पर इस नए कानून का कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा।

आखिर क्यों गई थी इन विधायकों की कुर्सी?

यह पूरा विवाद फरवरी 2024 के राज्यसभा चुनाव से जुड़ा है। इन छह कांग्रेसी विधायकों ने भाजपा उम्मीदवार हर्ष महाजन के पक्ष में क्रॉस वोटिंग की थी। इसके बाद विधानसभा में बजट और कटौती प्रस्ताव पर भी इन्होंने अपनी ही सरकार का साथ नहीं दिया। पार्टी व्हिप का खुला उल्लंघन करने पर स्पीकर कुलदीप सिंह पठानिया ने सख्त कदम उठाया था। उन्होंने मार्च 2024 में इन सभी छह विधायकों को अयोग्य घोषित कर दिया था।

सीएम सुक्खू ने बताया जनादेश का सम्मान

मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने सदन में इस विधेयक का मजबूती से बचाव किया। उन्होंने साफ कहा कि इस कानून का मकसद कांग्रेस को राजनीतिक फायदा पहुंचाना नहीं है। यह कदम राजनीतिक अवसरवाद और दलबदल को रोकने के लिए उठाया गया है। राज्य की 75 लाख जनता ने देखा कि कैसे चुनी हुई सरकार को गिराने की साजिश रची गई। यह संशोधन मौजूदा विधानसभा पर पूरी तरह लागू होगा।

भाजपा ने बताया बदले की भावना

विपक्षी दल भाजपा ने इस विधेयक का सदन में जोरदार विरोध किया। नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर ने कहा कि दलबदल रोकना सही है, लेकिन इसे पिछले समय से लागू करना गलत है। भाजपा विधायक रणधीर शर्मा ने इसे राजनीतिक बदले की भावना करार दिया। उनका दावा है कि यह कानून कानूनी जांच में अदालत में टिक नहीं पाएगा। भाजपा का तर्क है कि एक बार चुनाव जीतने के बाद विधायक पेंशन का हकदार हो जाता है।

सरकार ने विपक्ष को दिया कड़ा जवाब

सरकार की ओर से संसदीय कार्य मंत्री हर्षवर्धन चौहान ने विपक्ष को कड़ा जवाब दिया। उन्होंने कहा कि यह विधेयक भ्रष्ट राजनीति और दलबदल जैसी प्रथाओं को रोकने के लिए जरूरी है। उन्होंने भाजपा पर दलबदल का समर्थन करने का सीधा आरोप लगाया। राजस्व मंत्री जगत सिंह नेगी ने भी स्थिति को स्पष्ट किया। उन्होंने बताया कि यह कानून विधानसभा में पूरी और विस्तृत चर्चा के बाद ही लाया गया है।

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