Shimla News: हिमाचल प्रदेश में प्रशासनिक पुनर्गठन आयोग के गठन को मंजूरी मिलने के बाद रामपुर बुशहर को जिला बनाने की मांग फिर चर्चा में आ गई है। क्षेत्र के लोगों को उम्मीद है कि वर्षों से लंबित यह मांग अब पूरी हो सकती है। रामपुर को पहले से ही प्रदेश का अहम प्रशासनिक और व्यापारिक केंद्र माना जाता है।
रामपुर बुशहर लंबे समय से शिमला, कुल्लू और आसपास के कई इलाकों के लिए प्रशासनिक गतिविधियों का प्रमुख केंद्र रहा है। यहां कई जिला स्तरीय कार्यालय पहले से कार्यरत हैं। दूरदराज के ग्रामीण क्षेत्रों से लोग सरकारी कामकाज के लिए नियमित रूप से रामपुर पहुंचते हैं। इससे क्षेत्र की प्रशासनिक उपयोगिता लगातार बढ़ी है।
वीरभद्र सरकार में भी तेज हुई थी मांग
पूर्व मुख्यमंत्री स्वर्गीय राजा वीरभद्र सिंह के कार्यकाल में भी रामपुर को जिला बनाने की चर्चाएं काफी तेज हुई थीं। उस दौरान क्षेत्र के प्रशासनिक ढांचे को मजबूत करने के लिए कई कदम उठाए गए थे। इसी क्रम में रामपुर में मिनी सचिवालय भवन का निर्माण कराया गया था, जिसे भविष्य की तैयारी माना गया।
जिला बनने की संभावनाओं के चलते आसपास के ग्रामीण इलाकों में भी तेजी से विकास हुआ। रामपुर नगर परिषद क्षेत्र और कुल्लू जिले के निरमंड उपमंडल से जुड़े कई क्षेत्रों में हजारों भवन और व्यापारिक प्रतिष्ठान बने। स्थानीय लोगों का मानना है कि इससे क्षेत्र की आर्थिक गतिविधियों को नई दिशा मिली है।
दूरदराज क्षेत्रों को मिल सकती है बड़ी राहत
स्थानीय लोगों का कहना है कि रामपुर का भौगोलिक क्षेत्र काफी बड़ा है और कई इलाके दुर्गम हैं। जिला बनने की स्थिति में रामपुर, ननखड़ी, सराहन, तकलेच और अन्य ग्रामीण क्षेत्रों के लोगों को प्रशासनिक सेवाएं नजदीक मिल सकेंगी। इससे सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन और विकास कार्यों में भी तेजी आने की उम्मीद है।
रामपुर को जिला का दर्जा मिलने पर कुल्लू जिले के निरमंड उपमंडल के लोगों को भी राहत मिल सकती है। फिलहाल कई सरकारी कार्यों के लिए लोगों को करीब 200 किलोमीटर दूर कुल्लू मुख्यालय जाना पड़ता है। रामपुर जिला बनने पर लोगों को नजदीक ही प्रशासनिक सुविधाएं उपलब्ध हो सकेंगी और समय की बचत भी होगी।
Author: Sunita Gupta


