Himachal Pradesh News: कीरतपुर-मनाली फोरलेन को प्राकृतिक आपदाओं और ब्यास नदी की बाढ़ से सुरक्षित रखने के लिए केंद्र सरकार ने एक बड़ा मास्टर प्लान तैयार किया है। इस महत्वाकांक्षी परियोजना के तहत राजमार्ग पर चिह्नित लगभग 150 डेंजर जोन का सुदृढ़ीकरण किया जाएगा। इस पूरे प्रोजेक्ट पर करीब 4000 करोड़ रुपये खर्च होंगे।
नई दिल्ली में आयोजित एक उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक में केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने इस पर मंथन किया। उन्होंने भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआइ) को जल्द विस्तृत प्रस्ताव भेजने के निर्देश दिए। सरकार इस हाईवे को हर मौसम के अनुकूल बनाना चाहती है।
मानसून की तबाही और डेंजर जोन को सुरक्षित करने की योजना
विगत वर्षों में मानसून के दौरान कीरतपुर-मनाली फोरलेन को भूस्खलन और ब्यास नदी के उफान से भारी नुकसान पहुंचा था। कई जगहों पर सड़कें धंसने से यातायात हफ्तों बाधित रहा था। इससे सूबे का पर्यटन सीजन बुरी तरह प्रभावित हुआ और किसानों को भी भारी नुकसान उठाना पड़ा था।
इस मेगा प्रोजेक्ट के तहत कीरतपुर से मनाली तक उन 150 अति संवेदनशील स्थानों को पूरी तरह सुरक्षित किया जाएगा। आधुनिक तकनीक से पहाड़ों की कटिंग और तटीकरण किया जाएगा। आरसीसी वाल व क्रैश बैरियर के निर्माण से भविष्य में भूस्खलन और बाढ़ के खतरे से स्थायी निजात मिलेगी।
नितिन गडकरी के एनएचएआइ को सख्त निर्देश और मानसून की तैयारी
केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने बैठक में सख्त रुख अपनाते हुए एनएचएआइ अधिकारियों को समय सीमा के भीतर काम करने को कहा। उन्होंने निर्देश दिए कि हिमाचल प्रदेश के तमाम राष्ट्रीय राजमार्गों की मरम्मत का कार्य बरसात शुरू होने से पहले हर हाल में पूरा कर लिया जाए।
केंद्रीय मंत्री ने स्पष्ट किया कि मानसून के दौरान यात्रियों की सुरक्षा से कोई समझौता नहीं होगा। बैठक में प्राकृतिक आपदाओं से निपटने के लिए पुख्ता कदम उठाने पर जोर दिया गया। आपात स्थिति में मलबे को तुरंत हटाने के लिए संवेदनशील स्थानों पर भारी मशीनरी पहले से तैनात की जाएगी।
यातायात को सुचारू बनाए रखने के लिए जिला प्रशासन और एनएचएआइ को आपसी तालमेल से काम करने के निर्देश दिए गए हैं। इस सुरक्षात्मक कदम से न केवल पर्यटकों की यात्रा सुगम होगी, बल्कि स्थानीय बागवानों और कारोबारियों को भी आर्थिक नुकसान से बचाया जा सकेगा।
Author: Sunita Gupta

