Himachal News: हिमाचल प्रदेश के बैजनाथ में आज 1905 के विनाशकारी कांगड़ा भूकंप की 121वीं बरसी पर सुरक्षा तैयारियों का कड़ा इम्तिहान लिया गया। उपमंडलाधिकारी (SDM) कार्यालय परिसर में आयोजित इस मेगा मॉक ड्रिल ने उस खौफनाक मंजर की यादें ताजा कर दीं, जब सदियों पहले धरती डोलने से हजारों जिंदगियां खत्म हो गई थीं। आपदा प्रबंधन विभाग ने भूकंप की स्थिति में जान-माल के नुकसान को कम करने और प्रशासनिक मशीनरी की त्वरित प्रतिक्रिया को परखने के लिए यह अभ्यास किया।
6.4 तीव्रता का भूकंप और इमारतों के गिरने का खौफनाक दृश्य
मॉक ड्रिल के दौरान ठीक सुबह 6.4 तीव्रता के भूकंप आने की एक काल्पनिक स्थिति पैदा की गई। देखते ही देखते सरकारी इमारतों के क्षतिग्रस्त होने और मलबे में लोगों के दबने का सजीव प्रदर्शन किया गया। अफरा-तफरी के बीच सायरन की आवाज ने पूरे बैजनाथ उपमंडल को सतर्क कर दिया। इस अभ्यास का मुख्य उद्देश्य आपदा के समय विभिन्न सरकारी विभागों के बीच आपसी तालमेल और संचार व्यवस्था को मजबूत करना था, ताकि वास्तविक संकट के समय देरी न हो।
मलबे से निकाले गए घायल और प्राथमिक उपचार का सफल परीक्षण
जैसे ही भूकंप का संकेत मिला, बचाव दल तुरंत सक्रिय हो गया और मलबे में फंसे ‘घायलों’ को सुरक्षित निकालने का काम शुरू किया। अग्निशमन विभाग और स्वास्थ्य विभाग की टीमों ने मौके पर पहुंचकर घायलों को तत्काल प्राथमिक उपचार प्रदान किया। स्ट्रैचर के जरिए घायलों को एम्बुलेंस तक पहुंचाने की प्रक्रिया को समयबद्ध तरीके से पूरा किया गया। इस दौरान यह जांचा गया कि घायल व्यक्तियों को गोल्डन आवर के भीतर अस्पताल पहुंचाने में सिस्टम कितना सक्षम और तैयार है।
अग्निशमन विभाग ने सिखाए बचाव के गुर और सुरक्षा मंत्र
बैजनाथ अग्निशमन केंद्र के प्रभारी विजय कुमार ने इस अवसर पर उपस्थित कर्मचारियों और आम जनता को आपदा प्रबंधन की महत्वपूर्ण जानकारी दी। उन्होंने बताया कि भूकंप आने पर घबराने की जगह संयम से काम लेना सबसे ज्यादा जरूरी है। विजय कुमार ने सुरक्षा के ‘ड्रॉप, कवर और होल्ड’ जैसे बुनियादी नियमों का प्रदर्शन किया। उन्होंने अधिकारियों को सुझाव दिया कि कार्यालयों और सार्वजनिक स्थानों पर सुरक्षित निकासी द्वारों की पहचान पहले से ही सुनिश्चित कर लेनी चाहिए।
कांगड़ा भूकंप की 121वीं बरसी और इतिहास का वो काला दिन
आज से ठीक 121 साल पहले, 4 अप्रैल 1905 को आए भूकंप ने कांगड़ा घाटी को पूरी तरह तहस-नहस कर दिया था। उस भीषण आपदा में 20 हजार से अधिक लोगों की मौत हुई थी और कांगड़ा का ऐतिहासिक किला और मंदिर मलबे में तब्दील हो गए थे। इसी इतिहास को याद रखते हुए प्रशासन हर साल इस दिन को ‘सुरक्षा संकल्प’ के रूप में मनाता है। मॉक ड्रिल के जरिए नई पीढ़ी को भूकंप के खतरों और उनसे बचाव के तरीकों के प्रति जागरूक किया गया।
प्रशासनिक समन्वय और आधुनिक संचार व्यवस्था की हुई परख
मॉक ड्रिल के दौरान आपदा प्रबंधन से जुड़ी विभिन्न एजेंसियों के बीच तालमेल का भी परीक्षण किया गया। एसडीएम कार्यालय ने पुलिस, स्वास्थ्य, राजस्व और अग्निशमन विभागों के साथ वायरलेस और अन्य संचार साधनों के जरिए संपर्क साधा। आपदा के समय अक्सर नेटवर्क ठप हो जाता है, ऐसे में वैकल्पिक संचार व्यवस्था कितनी प्रभावी है, इसका भी बारीकी से निरीक्षण किया गया। अधिकारियों ने पाया कि सूचनाओं के आदान-प्रदान में तेजी लाकर ही बचाव कार्यों की सफलता सुनिश्चित की जा सकती है।
बैजनाथ के विभिन्न विभागों की सक्रिय भागीदारी और सतर्कता
इस मॉक ड्रिल में प्रशासनिक अधिकारियों के अलावा तहसील कार्यालय, स्वास्थ्य केंद्र और नागरिक सुरक्षा के स्वयंसेवकों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। उपमंडल प्रशासन का मानना है कि कांगड़ा जिला भूकंपीय जोन-5 में आता है, जो बेहद संवेदनशील क्षेत्र है। ऐसे में समय-समय पर होने वाले ये अभ्यास कर्मचारियों की कार्यक्षमता को बढ़ाते हैं। ड्रिल के अंत में सभी विभागों की कार्यप्रणाली की समीक्षा की गई और कमियों को भविष्य के लिए सुधारने के निर्देश जारी किए गए।


