Himachal Pradesh News: हिमाचल प्रदेश हाई कोर्ट ने राज्य की सुखविंदर सिंह सुक्खू सरकार को एक बड़ा झटका दिया है। अदालत ने बुधवार को बड़ा फैसला सुनाते हुए 900 असिस्टेंट स्टाफ नर्सों की भर्ती पर तुरंत प्रभाव से रोक लगा दी। कोर्ट ने कहा कि यह पूरी चयन प्रक्रिया मौजूदा कानूनी नियमों से बाहर है।
हाई कोर्ट ने मामले की सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की कार्यप्रणाली पर भी गंभीर सवाल उठाए। कोर्ट ने पूछा कि जब स्वास्थ्य विभाग में पहले से रेगुलर पद खाली पड़े हैं, तो सरकार ने तय नियमों को दरकिनार कर नर्सों का यह नया कैडर बनाने का फैसला आखिर क्यों किया?
हाई कोर्ट की डिवीजन बेंच ने नियुक्तियों पर लगाई पूरी तरह रोक
चीफ जस्टिस जीएस संधावालिया और जस्टिस बिपिन सी नेगी की डिवीजन बेंच ने सरकार को कड़ा निर्देश दिया है। अदालत ने कहा कि राज्य सरकार इस मामले में अगले आदेश तक कोई नया नियुक्ति पत्र जारी न करे। इसके साथ ही कोर्ट ने चुने गए उम्मीदवारों को काम पर रखने से भी मना कर दिया।
अदालत ने यह सख्त निर्देश विभिन्न सरकारी विभागों में आउटसोर्स कर्मचारियों की बढ़ती संख्या और गलत भर्ती नीतियों के खिलाफ दायर याचिकाओं पर सुनवाई के दौरान दिया। कोर्ट ने 6 नवंबर, 2025 को जारी हुई राज्य चयन आयोग की भर्ती नीति पर अपनी कड़ी आपत्ति दर्ज कराई।
अदालत ने सरकार के आउटसोर्सिंग मॉडल को गैर-कानूनी बताया
बेंच ने पाया कि सरकार ने बिना भर्ती नियमों में जरूरी संशोधन किए ही इस नए कैडर का गठन कर दिया था। कोर्ट ने सरकार की दलीलों को खारिज करते हुए कहा कि प्रस्तावित पदों के लिए वेतनमान और जरूरी सेवा शर्तें भी ठीक से तय नहीं की गई थीं।
रिकॉर्ड के मुताबिक, स्वास्थ्य और चिकित्सा शिक्षा विभाग में रेगुलर स्टाफ नर्सों के 1,535 स्वीकृत पद अभी खाली हैं। इसके बावजूद सरकार एक समानांतर सिस्टम खड़ा कर रही थी। प्रधान सचिव वित्त देवेश कुमार के हलफनामे से पता चला कि राज्य में आउटसोर्स कर्मचारियों की संख्या बढ़कर 26,724 हो गई है।
वित्तीय तंगी के बीच अधिकारियों के विदेश दौरों पर भी उठे सवाल
अदालत ने स्पष्ट किया कि वित्तीय नियम, 2009 का नियम 112 आउटसोर्सिंग को सिर्फ एक अस्थायी व्यवस्था मानता है, न कि परमानेंट नौकरी का विकल्प। सुनवाई के दौरान जापान के आधिकारिक दौरे पर गए स्वास्थ्य सचिव को कोर्ट में व्यक्तिगत पेशी से फिलहाल अस्थायी छूट मिल गई है।
बेंच ने राज्य की वित्तीय तंगी के दावों के बीच वरिष्ठ अधिकारियों के विदेश दौरों की जरूरत पर हैरानी जताई। अब हाई कोर्ट ने सुक्खू सरकार को 7 जुलाई, 2026 तक एक विस्तृत हलफनामा दाखिल करने का आदेश दिया है। इसके बाद मामले की अगली सुनवाई होगी।
Reported By: Sunita Gupta


