Himachal Pradesh News: हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने प्रदेश में आउटसोर्स भर्तियों पर पूरी तरह रोक लगा दी है। अदालत ने स्पष्ट आदेश दिए हैं कि राज्य सरकार और सरकारी उपक्रमों में कोई भी नियुक्ति भर्ती और पदोन्नति नियमों के उल्लंघन में नहीं होनी चाहिए। कोर्ट का यह सख्त फैसला प्रदेश के हजारों उम्मीदवारों के लिए काफी महत्वपूर्ण है।
आउटसोर्स भर्तियों को कोर्ट ने बताया मनमाना और भेदभावपूर्ण
मुख्य न्यायाधीश गुरमीत सिंह संधावालिया और न्यायाधीश बी सी नेगी की खंडपीठ ने इस पर गहरी नाराजगी जाहिर की है। कोर्ट ने कहा कि भर्ती नियमों को दरकिनार कर आउटसोर्सिंग करना पूरी तरह मनमाना और भेदभावपूर्ण है। सरकार केवल धन बचाने का बहाना बनाकर युवाओं और बेरोजगारों का शोषण किसी भी हाल में नहीं कर सकती है।
कोर्ट ने पिछली सुनवाई में स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए थे। बताया गया कि पहले लोगों को आउटसोर्स पर रखा जाता है और बाद में उन्हें रोगी कल्याण समिति में समाहित कर दिया जाता है। अधिकारियों ने अज्ञात उद्देश्यों के लिए इस गुप्त रास्ते का सहारा लिया है जो सीधे तौर पर नियमों का सरासर उल्लंघन है।
17 हजार से ज्यादा कर्मचारी अभी आउटसोर्सिंग पर कार्यरत
कोर्ट ने रिक्तियों के बारे में जानकारी मांगी थी। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, पूरे राज्य में करीब 17,114 कर्मचारी आउटसोर्सिंग के माध्यम से काम कर रहे हैं। इनमें पुलिस महानिदेशक के कार्यालय में 630, जल शक्ति विभाग में 542 और चिकित्सा शिक्षा निदेशालय में 2578 व्यक्ति शामिल हैं। यह संख्या साबित करती है कि बड़ी मात्रा में नियम तोड़े गए हैं।
कोर्ट ने स्वास्थ्य और वित्त सचिव को स्पष्टीकरण देने के लिए व्यक्तिगत रूप से कोर्ट में तलब किया था। अदालत ने सख्त लहजे में कहा कि रिक्तियां होने के बावजूद लोगों को वैधानिक अधिकारों से वंचित रखा गया है। अब इस मामले की अगली महत्वपूर्ण सुनवाई के लिए अदालत ने 7 जुलाई की तारीख तय की है।
Reported By: Sunita Gupta


