Himachal Pradesh News: हिमाचल प्रदेश के सिरमौर जिले से एक ऐसी अनूठी और प्रेरणादायक खबर सामने आई है, जिसने समाज में भाषा और धर्म की रूढ़िवादी दीवारों को पूरी तरह तोड़ दिया है। गोरक्षनाथ राजकीय संस्कृत कॉलेज नाहन की छात्रा नाजिया ने शास्त्री फाइनल ईयर की परीक्षा में पूरे कॉलेज में टॉप किया है।
देवभाषा संस्कृत को चुनकर नाजिया ने मनवाया अपनी प्रतिभा का लोहा
आमतौर पर मुस्लिम परिवारों में अरबी, उर्दू या मजहबी तालीम को अधिक प्राथमिकता दी जाती है। इसके विपरीत नाजिया ने देवभाषा संस्कृत को करियर के रूप में चुना। उन्होंने न केवल अपनी अद्भुत प्रतिभा का लोहा मनवाया, बल्कि समाज में गंगा-जमुनी तहज़ीब की एक बेहद खूबसूरत मिसाल भी पेश की है।
मूल रूप से सिरमौर के पांवटा साहिब उपमंडल के गांव रामपुर बंजारन की रहने वाली नाज़िया बचपन से ही पढ़ाई-लिखाई में कुशाग्र रही हैं। उनके पिता सलीम मोहम्मद एक साधारण फैक्ट्री में काम करते हैं। सीमित संसाधनों के बावजूद उन्होंने अपनी होनहार बेटी के बड़े सपनों को हमेशा पूरा सपोर्ट दिया।
नर्सिंग और जेबीटी छोड़कर चुनी शास्त्री की कठिन राह
नाजिया ने विपरीत परिस्थितियों के बावजूद कॉलेज परीक्षा में 1000 में से 785 अंक हासिल कर पहला स्थान पाया है। जमा दो की पढ़ाई पूरी करने के बाद उन्होंने एक साथ तीन अलग-अलग क्षेत्रों नर्सिंग, जेबीटी और शास्त्री की प्रवेश परीक्षाएं पास कर ली थीं। उनके पास करियर के कई बेहतरीन ऑप्शन खुले थे।
नाजिया ने अपनी अध्यापिका के विशेष मार्गदर्शन पर संस्कृत कॉलेज, नाहन में शास्त्री डिग्री में एडमिशन लेने का बड़ा फैसला किया। उन्होंने अपने इस अनोखे और साहसी फैसले को बिल्कुल सही साबित किया है। इस ऐतिहासिक सफलता से उन्होंने अपने माता-पिता के साथ पूरे क्षेत्र का नाम चमका दिया है।
कॉलेज के प्रिंसिपल ने होनहार छात्रा को दी बधाई
संस्कृत कॉलेज नाहन के प्रिंसिपल डॉक्टर नरेश शर्मा ने बताया कि नाजिया ने अपनी कड़ी मेहनत से कॉलेज का गौरव बढ़ाया है। उन्होंने यह भी जानकारी दी कि मुस्लिम समुदाय से ही ताल्लुक रखने वाली एक अन्य छात्रा आयशा परवीन भी सेकंड ईयर पास कर अब शास्त्री फाइनल ईयर में पहुंच चुकी है।
एक साधारण परिवार की बेटी नाजिया की इस बहुमुखी सफलता और संस्कृत के प्रति उनके इस अनोखे प्रेम की हर तरफ जमकर सराहना हो रही है। लोगों का कहना है कि नाजिया की यह ऐतिहासिक कामयाबी उन सभी रूढ़िवादी लोगों के लिए एक करारा जवाब है, जो शिक्षा या भाषा को धर्म के संकीर्ण चश्मे से देखते हैं।
Reported By: Sunita Gupta



