Himachal News: हिमाचल प्रदेश सरकार ने राज्य के गहरे वित्तीय संकट से निपटने के लिए एक बड़ा फैसला लिया है। प्रदेश में करीब 27 वर्षों के लंबे अंतराल के बाद एक बार फिर लॉटरी शुरू होने जा रही है। राजस्व बढ़ाने के नए विकल्प तलाश रही सरकार ने इसके लिए आधुनिक ऑनलाइन सॉफ्टवेयर भी तैयार कर लिया है। चुनाव संपन्न होने के बाद आदर्श आचार संहिता हटते ही इस योजना को औपचारिक रूप से लॉन्च कर दिया जाएगा। यह कदम बढ़ते कर्ज के बोझ को कम करने के लिए उठाया गया है।
ऑनलाइन सॉफ्टवेयर के जरिए पारदर्शी संचालन
इस बार लॉटरी का संचालन पूरी तरह डिजिटल और आधुनिक होगा। सरकार ने इसके लिए विशेष सॉफ्टवेयर विकसित किया है ताकि टिकट वितरण और ड्रा प्रक्रिया में पारदर्शिता बनी रहे। किसी भी प्रकार की गड़बड़ी को रोकने के लिए भुगतान प्रणाली को भी ऑनलाइन रखा गया है। हर्षवर्धन चौहान की अध्यक्षता वाली मंत्रिमंडलीय उपसमिति ने इस संबंध में अपनी विस्तृत नियमावली सरकार को सौंप दी है। सरकार का मानना है कि डिजिटल माध्यम से लॉटरी चलाने से प्रबंधन आसान होगा और भ्रष्टाचार की गुंजाइश पूरी तरह समाप्त हो जाएगी।
1.10 लाख करोड़ के कर्ज तले दबा प्रदेश
हिमाचल प्रदेश वर्तमान में करीब 1,10,500 करोड़ रुपये के भारी ऋण के नीचे दबा हुआ है। वित्तीय वर्ष 2026-27 के शुरुआती दौर में ही सरकार 900 करोड़ रुपये का कर्ज ले चुकी है। दैनिक खर्चों के प्रबंधन के लिए सरकार को लगातार उधारी का सहारा लेना पड़ रहा है। इसी माह 500 करोड़ रुपये का अतिरिक्त ऋण लेने की तैयारी भी चल रही है। ऐसे में राजस्व जुटाने के लिए लॉटरी को एक महत्वपूर्ण और अनिवार्य आर्थिक विकल्प के रूप में देखा जा रहा है।
राजस्व में करोड़ों की आय का अनुमान
प्रधान सचिव वित्त देवेश कुमार के अनुसार लॉटरी खुले बाजार में टिकटों के रूप में नहीं बिकेगी। लोग इसे केवल ऑनलाइन माध्यम से ही खेल सकेंगे। हालांकि विशेष अवसरों पर लकी ड्रा के विकल्प चिन्हित स्थानों पर उपलब्ध रहेंगे। सरकार को उम्मीद है कि इस नई व्यवस्था से हर साल 75 से 100 करोड़ रुपये का अतिरिक्त राजस्व प्राप्त होगा। भले ही यह राशि कुल कर्ज के मुकाबले छोटी हो, लेकिन आय के नए स्रोत विकसित करने की दिशा में इसे बड़ी सफलता माना जा रहा है।
1999 में सामाजिक कारणों से लगा था प्रतिबंध
हिमाचल प्रदेश में वर्ष 1999 में तत्कालीन प्रेम कुमार धूमल सरकार ने लॉटरी पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया था। उस समय कई महिलाओं ने शिकायत की थी कि उनके पति लॉटरी में पूरा वेतन गंवा रहे हैं। सामाजिक ढांचे को बचाने के लिए सरकार ने तब यह कड़ा फैसला लिया था। अब 27 साल बाद बदली हुई परिस्थितियों और आर्थिक मजबूरी के कारण सरकार ने इस प्रतिबंध को हटाने का निर्णय लिया है। सरकार अब सामाजिक और आर्थिक संतुलन साधने की कोशिश कर रही है।


