हिमाचल की 4500 करोड़ की सेब आर्थिकी पर बड़ा संकट, इस साल 1 करोड़ पेटी कम होगा उत्पादन, क्या आसमान छुएंगे दाम?

Himachal News: हिमाचल प्रदेश की साढ़े चार हजार करोड़ रुपये की सेब आर्थिकी पर इस साल बड़ा संकट मंडरा रहा है। मौसम की बेरुखी के कारण इस बार सेब के उत्पादन में भारी गिरावट आने की आशंका है। बागवानी विभाग के शुरुआती अनुमानों के मुताबिक, इस साल सेब की पैदावार में करीब एक करोड़ पेटी की कमी आ सकती है।

उत्पादन में भारी गिरावट से बढ़ेगी उपभोक्ताओं की जेब पर मार

बागवानी विभाग के प्रारंभिक आकलन के अनुसार, प्रदेश में इस वर्ष लगभग 2.50 करोड़ सेब की पेटियों का उत्पादन होने की उम्मीद है। यह आंकड़ा पिछले साल के मुकाबले काफी कम है, क्योंकि पिछले वर्ष राज्य में लगभग 3.50 करोड़ पेटियों का उत्पादन हुआ था। आमतौर पर सेब की एक पेटी में औसतन 20 किलो फल आता है।

उत्पादन में इतनी बड़ी गिरावट का सीधा और साफ असर अब सीधे बाजार पर पड़ने वाला है। आपूर्ति कम होने से आने वाले दिनों में उपभोक्ताओं को बाजार से काफी महंगे दामों पर सेब खरीदना पड़ सकता है। हालांकि, कम उत्पादन की वजह से बागवानों को मंडियों में अपनी फसल के बेहतर दाम मिलने की उम्मीद भी जताई जा रही है।

इन कारणों से सेब की फसल को पहुंचा भारी नुकसान

विशेषज्ञों के मुताबिक, जनवरी से अप्रैल के बीच राज्य में मौसम बेहद असामान्य रहा। इस दौरान कम हिमपात, भारी ओलावृष्टि, तेज आंधी और कई इलाकों में फूल झड़ने से फसल बुरी तरह प्रभावित हुई। मार्च में अचानक बढ़े तापमान और फिर तुरंत हुई ठंड ने सेब की सेटिंग को सबसे ज्यादा नुकसान पहुंचाया है।

ऊंचाई वाले इलाकों में तो स्थिति फिर भी थोड़ी ठीक रही, लेकिन मध्यम ऊंचाई वाले मुख्य सेब उत्पादक क्षेत्रों में फसल को भारी चोट पहुंची है। इस बार सेब के साथ-साथ अन्य फलों की पैदावार भी प्रभावित हुई है। सेब उत्पादन में अकेले शिमला जिले का योगदान सबसे ज्यादा करीब 80 प्रतिशत तक रहता है।

पूरी आर्थिकी और रोजगार पर दिखेगा इसका बुरा असर

सेब की पैदावार घटने का असर सिर्फ बागवानों की कमाई तक ही सीमित नहीं रहेगा। इसका व्यापक असर परिवहन, पैकेजिंग सामग्री के कारोबार, विपणन और मजदूरी जैसे बड़े क्षेत्रों पर भी पड़ेगा। फसल कम होने से ट्रकों की मांग और पैकेजिंग बॉक्स के कारोबार में बड़ी गिरावट आने की आशंका जताई जा रही है।

बागवानी विभाग के सचिव सी पालरासु ने बताया कि मौसम की खराब परिस्थितियों का असर उत्पादन पर साफ दिख रहा है। हालांकि, अंतिम आंकड़े सीजन पूरी तरह शुरू होने के बाद ही स्पष्ट हो पाएंगे। विभाग इस समय बागवानों को तकनीकी सहायता और जरूरी सलाह दे रहा है ताकि बीमारियों से होने वाले नुकसान को रोका जा सके।

हिमाचल प्रदेश में पिछले सालों के सेब उत्पादन पर एक नजर

राज्य में पिछले कुछ सालों के दौरान सेब का उत्पादन काफी उतार-चढ़ाव भरा रहा है। मौसम में लगातार आ रहे बदलावों के कारण हर साल पैदावार के आंकड़ों में बड़ा अंतर देखने को मिल रहा है। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, पिछले छह वर्षों में राज्य का सेब उत्पादन इस प्रकार रहा है:

  • वर्ष 2020-21 में राज्य में कुल 3.06 करोड़ पेटी सेब का उत्पादन हुआ था।
  • वर्ष 2021-22 में यह ग्राफ थोड़ा बढ़कर 3.36 करोड़ पेटी तक पहुंच गया था।
  • वर्ष 2022-23 में भारी गिरावट आई और महज 2.11 करोड़ पेटी उत्पादन दर्ज हुआ।
  • वर्ष 2023-24 में स्थिति थोड़ी सुधरी और कुल 2.52 करोड़ पेटी सेब का उत्पादन हुआ।
  • वर्ष 2024-25 में रिकॉर्ड बढ़ोतरी के साथ उत्पादन 3.50 करोड़ पेटी तक पहुंच गया।
  • वर्ष 2025-26 के लिए इस बार महज 2.50 करोड़ पेटी उत्पादन का ही प्रारंभिक अनुमान है।

इस तरह आंकड़ों का यह विश्लेषण साफ दिखाता है कि मौसम किस तरह हिमाचल की सेब आर्थिकी को प्रभावित कर रहा है। बागवानों को इस संकट से उबारने के लिए अब आधुनिक तकनीकों और उन्नत किस्मों की तरफ रुख करना होगा, ताकि भविष्य में इस तरह के बड़े आर्थिक नुकसान से बचा जा सके।

Author: Sunita Gupta

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