हिमाचल के जंगलों से चमकेगी ग्रामीणों की किस्मत: AI और सैटेलाइट तकनीक से खुलेगा 22,600 करोड़ की ‘हरित अर्थव्यवस्था’ का रास्ता

Himachal Pradesh News: हिमाचल प्रदेश के जंगलों को लेकर एक बेहद सकारात्मक और बड़ी रिपोर्ट सामने आई है। राज्य वन विभाग अब अत्याधुनिक सैटेलाइट इमेज, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और मशीन लर्निंग तकनीक के जरिए जंगलों के संरक्षण के साथ-साथ ग्रामीण अर्थव्यवस्था को एक नई मजबूती देने की दिशा में तेजी से काम कर रहा है।

‘काउंटिंग ग्रीन वेल्थ’ रिपोर्ट में हुआ बड़ा खुलासा

राज्य वन विभाग और इंडियन स्कूल ऑफ बिजनेस (ISB) के भारती इंस्टीट्यूट ऑफ पब्लिक पॉलिसी ने संयुक्त रूप से ‘काउंटिंग ग्रीन वेल्थः टुवर्ड्स ए फ्यूचर-रेडी पीपल्स फॉरेस्ट इकोनॉमी इन हिमाचल’ रिपोर्ट जारी की है। इस विस्तृत रिपोर्ट के मुताबिक, राज्य के जंगलों से 22,600 करोड़ रुपये की विशाल हरित जैव-अर्थव्यवस्था (Green Bio-Economy) विकसित होने की उम्मीद है।

मुख्य सचिव केके पंत, भारती इंस्टीट्यूट के कार्यकारी निदेशक प्रो. अश्विनी छात्रे और पर्यावरण विज्ञान विभाग के निदेशक डॉ. पुष्पेंद्र राणा ने यह ऐतिहासिक रिपोर्ट जारी की। मुख्य सचिव ने कहा कि यह रिपोर्ट ‘हरित हिमाचल, समृद्ध हिमाचल’ के सपने को सच करने के लिए वैज्ञानिक मूल्यांकन और ग्रामीण समृद्धि को एक साथ जोड़ेगी।

वन रक्षकों ने तैयार किया 2 लाख से ज्यादा वृक्षों का डेटाबेस

इस अनूठे मॉडल को तैयार करने के लिए 500 से अधिक वन रक्षकों और फील्ड कर्मचारियों ने बेहद कठिन भौगोलिक परिस्थितियों में काम किया। इन कर्मचारियों ने जमीन पर उतरकर दो लाख से अधिक जियो-रेफरेंस्ड वृक्ष रिकॉर्ड और प्रजाति-आधारित तस्वीरों का एक विशाल डेटाबेस तैयार किया है, जो पूरे देश के लिए एक राष्ट्रीय मॉडल बनेगा।

इन चार प्रमुख क्षेत्रों से होगी हजारों करोड़ की कमाई

इस विशेष अध्ययन में ग्रामीण आजीविका को बढ़ाने के लिए मुख्य रूप से चार क्षेत्रों की पहचान की गई है। इसमें जंगली फलों और स्वास्थ्य से जुड़े प्राकृतिक उत्पादों का 11,340 करोड़ रुपये का विशाल बाजार शामिल है। इसके अलावा, चीड़ की सूखी पत्तियों से बनने वाले इको-कोल (Eco-Coal) उत्पादन से करीब 5,500 करोड़ रुपये का नया उद्योग खड़ा होगा।

वहीं, खैर की लकड़ी पर आधारित 5,000 करोड़ रुपये का एक विनियमित उद्योग विकसित किया जाएगा। इसके साथ ही बांस आधारित निर्माण सामग्री और पर्यावरण के अनुकूल बायोफ्यूल के जरिए 760 करोड़ रुपये का बाजार तैयार होगा। इस योजना से ग्रामीण स्तर पर रोजगार के लाखों नए अवसर पैदा होने की उम्मीद है।

जंगली फल और फूलों से बदलेगी तस्वीर

वैज्ञानिक शोध में राज्य के विभिन्न वन उत्पादों की वास्तविक आर्थिक क्षमता का भी सटीक आकलन किया गया है। रिपोर्ट के अनुसार, अकेले आंवला से 8,700 करोड़ रुपये और जंगली आम से 4,800 करोड़ रुपये की आय संभव है। वहीं, लगभग 8 लाख टन साल के बीजों से 2,400 करोड़ रुपये और 3 लाख टन बुरांश के फूलों से 1,200 करोड़ रुपये की कमाई की जा सकती है।

Author: Sunita Gupta

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