Sports News: इंटरनेशनल क्रिकेट काउंसिल यानी आईसीसी को आज दुनिया की सबसे अमीर और शक्तिशाली खेल संस्थाओं में गिना जाता है। पूरे विश्व में क्रिकेट की देखरेख और नियम बनाने वाली इस सर्वोच्च संस्था में आज दुनिया भर के लगभग सभी प्रमुख देश शामिल हैं।
क्रिकेट इतिहास के जानकारों के अनुसार, इस विशाल संस्था की शुरुआत की कहानी बेहद दिलचस्प है। बहुत कम लोग जानते हैं कि शुरुआत में इसका गठन सिर्फ तीन देशों के लिए हुआ था। उस समय इसका नाम और काम करने का तरीका आज से बिल्कुल अलग था।
क्रिकेट की इस वैश्विक संचालन संस्था की नींव साल 1909 में इंग्लैंड, ऑस्ट्रेलिया और दक्षिण अफ्रीका ने मिलकर रखी थी। इन तीनों देशों के बीच बढ़ते अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट संबंधों को व्यवस्थित करने के लिए इस खास संस्था का गठन पहली बार किया गया था।
एक पत्र से हुई थी आईसीसी की शुरुआत
इस संस्था को बनाने के पीछे दक्षिण अफ्रीका के मशहूर कारोबारी और क्रिकेट प्रशासक एबे बेली का बड़ा हाथ था। बेली ने ही साल 1907 में इंग्लैंड के मैरीलेबोन क्रिकेट क्लब (MCC) को एक ऐतिहासिक पत्र लिखकर इस साझा संस्था को बनाने का सुझाव दिया था।
शुरुआत में इसे ‘इम्पीरियल क्रिकेट कॉन्फ्रेंस’ नाम दिया गया था। इस नाम से ही साफ था कि इसकी सदस्यता केवल ब्रिटिश साम्राज्य के देशों तक ही सीमित थी। समय के साथ साल 1926 में इसमें भारत, न्यूजीलैंड और वेस्टइंडीज को जगह मिली।
बाद में पाकिस्तान, श्रीलंका और जिम्बाब्वे जैसे देश भी इस संस्था का हिस्सा बनते चले गए। साल 1965 में इसका नाम बदलकर ‘इंटरनेशनल क्रिकेट कॉन्फ्रेंस’ किया गया। इसके बाद साल 1989 में इसे ‘इंटरनेशनल क्रिकेट काउंसिल’ का मौजूदा नाम मिला।
1993 में खत्म हुआ इंग्लैंड-ऑस्ट्रेलिया का दबदबा
साल 1993 आईसीसी के इतिहास में एक बड़ा और ऐतिहासिक मोड़ लेकर आया। इस साल तक इंग्लैंड और ऑस्ट्रेलिया ही मुख्य रूप से आईसीसी को चलाते थे। लेकिन भारत, पाकिस्तान और श्रीलंका के बढ़ते कद के कारण दोनों देशों का यह दबदबा हमेशा के लिए खत्म हो गया।
इसी साल आईसीसी पूरी तरह से एमसीसी के प्रशासनिक नियंत्रण से आजाद हो गई। संस्था का अपना स्वतंत्र सचिवालय और सीईओ नियुक्त किया गया। बारबाडोस के सर क्लाइड वॉलकॉट आईसीसी के इतिहास में पहले गैर-ब्रिटिश अध्यक्ष चुने गए, जो एक बड़ा बदलाव था।
जब एक भारतीय ने बदला आईसीसी का भाग्य
आज भले ही आईसीसी के पास अरबों की संपत्ति है, लेकिन 1990 के दशक तक इसकी आर्थिक स्थिति बेहद खराब थी। संस्था की आय केवल सदस्य देशों की फीस पर निर्भर थी। फिर भारत के दिग्गज क्रिकेट प्रशासक जगमोहन डालमिया की एंट्री ने पूरा सिस्टम बदल दिया।
साल 1996 में भारत, श्रीलंका और पाकिस्तान में हुए वर्ल्ड कप की ऐतिहासिक सफलता ने साबित कर दिया कि अब एशिया ही क्रिकेट का असली आर्थिक केंद्र है। इसके बाद साल 1997 में जगमोहन डालमिया आईसीसी के पहले भारतीय अध्यक्ष बने।
डालमिया के कार्यकाल में ही साल 1998 में आईसीसी नॉकआउट टूर्नामेंट शुरू हुआ, जिसे आज चैंपियंस ट्रॉफी कहा जाता है। इसके टीवी प्रसारण अधिकारों और भारी-भरकम स्पॉन्सरशिप से आईसीसी की कमाई में रिकॉर्ड तोड़ बढ़ोतरी हुई और संस्था आर्थिक रूप से महाशक्ति बन गई।
लंदन से दुबई शिफ्ट हुआ मुख्यालय
आईसीसी के इतिहास में एक और बड़ा बदलाव साल 2005 में आया, जब इसके मुख्यालय को लंदन से हटाकर हमेशा के लिए दुबई स्थानांतरित कर दिया गया। इसी साल इंटरनेशनल विमन्स क्रिकेट काउंसिल का भी पूरी तरह से आईसीसी में विलय कर दिया गया था।
वर्तमान समय में आईसीसी के सदस्य देशों की कुल संख्या बढ़कर 108 तक पहुंच चुकी है। संस्था ने साल 1975 में पहला मेंस वनडे वर्ल्ड कप और साल 2007 में पहला टी20 वर्ल्ड कप आयोजित किया था, जो आज दुनिया के सबसे बड़े आयोजनों में शामिल हैं।
Author: Prem Sharma

