Himachal News: हिमाचल प्रदेश में पंचायत चुनावों से ठीक पहले सियासी पारा सातवें आसमान पर पहुंच गया है। नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर ने मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू पर हमला बोलते हुए कहा कि सरकार को बिना सोचे-समझे उल-जलूल फैसले लेने की आदत हो गई है। विपक्ष का मुख्य विरोध जिलों के उपायुक्तों (DC) को आरक्षण रोस्टर में दी गई 5 प्रतिशत फेरबदल की शक्ति को लेकर है। जयराम ठाकुर ने इसे सीधे तौर पर सत्ता का दुरुपयोग बताया। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार अपने चहेते कार्यकर्ताओं को फायदा पहुंचाने के लिए लोकतंत्र के साथ खिलवाड़ कर रही है।
सदन में भारी हंगामा और विपक्ष का वॉकआउट
विधानसभा की कार्यवाही शुरू होते ही भाजपा विधायक रणधीर शर्मा ने नियम 67 के तहत स्थगन प्रस्ताव पेश किया। विपक्ष ने इस मुद्दे पर तुरंत चर्चा की मांग की, जिसे लेकर सदन में जमकर नारेबाजी हुई। हंगामे के कारण विधानसभा अध्यक्ष कुलदीप सिंह पठानिया को सदन की कार्यवाही 20 मिनट के लिए स्थगित करनी पड़ी। जब स्थगन प्रस्ताव को खारिज कर दिया गया, तो विपक्षी विधायकों ने सदन से वॉकआउट कर दिया। जयराम ठाकुर ने मीडिया से कहा कि सरकार की मंशा चुनाव करवाने की नहीं बल्कि उसे टालने की है।
डीसी को दी गई शक्तियों पर बवाल
नेता प्रतिपक्ष ने स्पष्ट किया कि वार्ड सदस्यों, प्रधानों और पंचायत समिति अध्यक्षों के रोस्टर में बदलाव का अधिकार डीसी को देना तानाशाही है। उन्होंने कहा कि भौगोलिक विषमताओं के नाम पर जो शक्तियां सौंपी गई हैं, उनका इस्तेमाल राजनीतिक लाभ के लिए किया जाएगा। जयराम ठाकुर के अनुसार, सरकार कोर्ट के आदेशों की अवहेलना कर रही है। भाजपा ने इस निर्णय को पंचायती राज संस्थाओं की स्वायत्तता पर सीधा प्रहार बताया है।
सत्ता के दुरुपयोग का लगाया गंभीर आरोप
जयराम ठाकुर ने आरोप लगाया कि कांग्रेस सरकार निष्पक्ष चुनाव से डर रही है। उन्होंने कहा कि बार-बार फैसलों को वापस लेने से पूरे प्रदेश में सरकार की जग हंसाई हो रही है। विपक्ष ने मांग की है कि सरकार इस जनविरोधी और तानाशाही फैसले को तुरंत वापस ले। भाजपा विधायक दल ने चेतावनी दी है कि वे इस निर्णय का सड़कों से लेकर सदन तक डटकर विरोध करेंगे। फिलहाल पंचायत चुनाव के रोस्टर को लेकर प्रदेश में भ्रम की स्थिति बनी हुई है।


