हिमाचल प्रदेश में स्वास्थ्य सेवाओं का हुआ कायाकल्प, सरकारी अस्पतालों में 85 प्रतिशत तक बढ़ा स्टाफ

Shimla News: हिमाचल प्रदेश की सुक्खू सरकार ने राज्य में स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर बड़ा दावा किया है। स्वास्थ्य मंत्री धनीराम शांडिल ने बताया कि सरकार बनने के समय स्वास्थ्य विभाग में केवल 35 से 36 प्रतिशत स्टाफ था। इसे अब बढ़ाकर 80 से 85 प्रतिशत कर दिया गया है।

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स्वास्थ्य मंत्री ने मंगलवार को सचिवालय में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में विभाग की कई बड़ी उपलब्धियां गिनाईं। उन्होंने माना कि कुछ इलाकों में अब भी स्टाफ की कमी है। इसे जल्द ही चरणबद्ध तरीके से दूर किया जाएगा। सरकार दूरदराज के क्षेत्रों में स्वास्थ्य सुविधाएं बेहतर कर रही है।

हिमकेयर और आयुष्मान भारत योजना का भुगतान जल्द

धनीराम शांडिल ने स्वीकार किया कि हिमकेयर योजना के 425 करोड़ और आयुष्मान भारत योजना के 235 करोड़ रुपये लंबित हैं। केंद्र सरकार द्वारा वित्तीय सीमा तय करने से यह भुगतान प्रभावित हुआ है। सहारा योजना के लाभार्थियों को भी एक हफ्ते के भीतर तीन हजार रुपये की सहायता राशि दी जाएगी।

आदर्श स्वास्थ्य संस्थानों में मिलेंगी आधुनिक मशीनें

प्रदेश में 70 आदर्श स्वास्थ्य संस्थानों का विकास तेजी से किया जा रहा है। इनमें से 50 से अधिक अस्पतालों में विशेषज्ञ डॉक्टरों की तैनाती हो चुकी है। इन संस्थानों में सीटी स्कैन, अल्ट्रासाउंड और एक्स-रे जैसी आधुनिक जांच सुविधाएं प्राथमिकता के आधार पर शुरू की जा रही हैं।

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स्वास्थ्य विभाग में 500 से अधिक नई भर्तियां

सरकार ने स्वास्थ्य विभाग में खाली पदों को भरने की प्रक्रिया तेज कर दी है। अब तक 300 से अधिक मेडिकल डॉक्टरों के पद भरे जा चुके हैं। इसके अलावा 200 नए डॉक्टरों की भर्ती के लिए जल्द ही लोक सेवा आयोग को नया प्रस्ताव भेजा जाएगा।

विभाग में स्टाफ नर्सों के 200 पदों पर भी भर्ती प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। इनमें से 71 पद बैचवाइज आधार पर भरे जा चुके हैं। राज्य में स्वास्थ्य ढांचे के विस्तार और नए भवनों के निर्माण के लिए पिछले एक साल में 325 करोड़ रुपये जारी किए गए हैं।

अस्पतालों में रोबोटिक सर्जरी और करोड़ो के उपकरण

हिमाचल के बड़े अस्पतालों में आधुनिक रोबोटिक सर्जरी की सुविधा शुरू की जा रही है। यह तकनीक आईजीएमसी शिमला, चमियाणा, टांडा और नेरचौक मेडिकल कॉलेज में स्थापित हो चुकी है। हमीरपुर मेडिकल कॉलेज में भी इस अत्याधुनिक तकनीक को शुरू करने की तैयारी चल रही है।

आईजीएमसी शिमला में 20.72 करोड़ की पीईटी-सीटी स्कैन और 22.80 करोड़ की 3-टेस्ला एमआरआई मशीन लगाई गई है। निजी अस्पतालों को हिमकेयर से बाहर रखने पर उन्होंने कहा कि बिलों में गड़बड़ी के कारण यह फैसला लिया गया ताकि सरकारी व्यवस्था में पारदर्शिता बनी रहे।

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