हिमाचल पंचायत चुनाव के चौंकाने वाले आंकड़े, डिग्रियों पर भारी पड़ा मतदाताओं का भरोसा, अनपढ़ भी बने ‘प्रधान’

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Himachal News: हिमाचल प्रदेश के पंचायत चुनावों ने ग्रामीण लोकतंत्र की एक बेहद अनोखी और दिलचस्प तस्वीर पेश की है। राज्य निर्वाचन आयोग के ताजा आंकड़े बताते हैं कि गांवों की सरकार में इस बार जहां बड़े-बड़े डिग्रीधारक चुनकर आए हैं, वहीं कई अनपढ़ उम्मीदवार भी बाजी मारने में सफल रहे हैं।

प्रदेश की 3,754 पंचायतों में तीन चरणों में चुनाव संपन्न हुए। इस चुनावी प्रक्रिया के बाद कुल 30 हजार से अधिक जनप्रतिनिधि निर्वाचित हुए हैं। इनमें पंचायत प्रधान, उपप्रधान, वार्ड सदस्य, बीडीसी मेंबर और जिला परिषद सदस्य शामिल हैं। मतदाताओं ने उम्मीदवारों की किस्मत का फैसला पूरी समझदारी से किया है।

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चुनाव परिणाम के आंकड़े साफ संकेत देते हैं कि ग्रामीण राजनीति में शिक्षा जरूरी है। इसके बावजूद जनता का भरोसा केवल बड़ी-बड़ी डिग्रियों पर नहीं टिका है। ग्रामीण वोटरों ने उम्मीदवारों के स्थानीय जुड़ाव, सामाजिक अनुभव और उनके व्यवहार को ज्यादा महत्व दिया है। यही कारण है कि चुनावी नतीजे काफी चौंकाने वाले रहे हैं।

सैकड़ों अनपढ़ उम्मीदवार जीते और दसवीं पास प्रतिनिधियों का दबदबा

राज्य निर्वाचन आयोग के आंकड़ों के मुताबिक इस बार कुल 924 अनपढ़ उम्मीदवारों ने चुनाव लड़ा था। इनमें से 443 अनपढ़ उम्मीदवार जीत दर्ज करने में सफल रहे। यह संख्या कुल चुने गए प्रतिनिधियों का 1.43 प्रतिशत है। यह आंकड़ा साबित करता है कि जनता के बीच पहचान आज भी सबसे बड़ा पैमाना है।

हालांकि पंचायतों की नई सरकार में सबसे बड़ा वर्ग दसवीं पास प्रतिनिधियों का है। चुनाव में 31,778 मैट्रिक पास उम्मीदवारों ने अपनी किस्मत आजमाई थी। इनमें से 13,786 जनप्रतिनिधि चुनाव जीतकर आए हैं। पंचायतों में चुने गए लगभग हर दो में से एक प्रतिनिधि दसवीं पास योग्यता रखता है।

ग्रामीण नेतृत्व में बुनियादी शिक्षा प्राप्त लोगों की यह मौजूदगी कुल संख्या का 44.46 प्रतिशत है। इसके बाद दूसरा सबसे बड़ा वर्ग 12वीं पास प्रतिनिधियों का है। प्रदेश भर में 7,176 उम्मीदवार इस योग्यता के साथ जीते हैं, जिनकी हिस्सेदारी 23.14 प्रतिशत दर्ज की गई है।

उच्च शिक्षा प्राप्त युवा पहुंचे पंचायत और महिलाओं ने रचा इतिहास

आंकड़ों के मुताबिक 5,749 प्रतिनिधि ऐसे भी हैं जिनकी शैक्षणिक योग्यता दसवीं से कम है। इनकी कुल हिस्सेदारी 18.54 प्रतिशत है। इसके विपरीत उच्च शिक्षा प्राप्त प्रतिनिधियों की संख्या भी काफी अच्छी है। कुल 2,605 स्नातक और 1,251 स्नातकोत्तर डिग्रीधारक उम्मीदवार भी चुनाव जीतकर पंचायतों तक पहुंचे हैं।

इन आंकड़ों से स्पष्ट है कि पंचायतों में पढ़े-लिखे युवाओं की रुचि लगातार बढ़ रही है। दूसरी तरफ महिलाओं ने इस बार के चुनावों में पुरुषों को काफी पीछे छोड़ दिया है। कुल 16,691 महिलाएं विभिन्न पदों पर निर्वाचित हुई हैं, जो कुल संख्या का 53.85 प्रतिशत हैं।

इस बार केवल 14,320 पुरुष प्रतिनिधि ही जीत दर्ज कर सके हैं। आयु वर्ग के लिहाज से सबसे अधिक 10,850 प्रतिनिधि 31 से 40 वर्ष के बीच के हैं। वहीं आर्थिक पृष्ठभूमि की बात करें तो 201 आयकरदाता, 27,581 एपीएल परिवार और 2,096 बीपीएल परिवार से जुड़े प्रतिनिधि चुने गए हैं।

Author: Sunita Gupta

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