हिमाचल नगर निकाय चुनाव के नतीजों के बाद बीजेपी में मची भारी कलह, टिकट बंटवारे पर अपनों ने ही खोला मोर्चा

- Advertisement -

Himachal News: हिमाचल प्रदेश में नगर निकाय चुनाव के नतीजे आते ही भारतीय जनता पार्टी के भीतर की आपसी खींचतान खुलकर सामने आ गई है। टिकट आवंटन के समय शुरू हुई नेताओं की नाराजगी अब हार-जीत के बाद और ज्यादा बढ़ गई है। प्रदेश के कई मंडलों में पार्टी नेताओं के बीच बढ़े गहरे मतभेद अब सार्वजनिक हो चुके हैं।

विधायकों के गढ़ में पार्टी समर्थित उम्मीदवारों की करारी हार

निकाय चुनाव के दौरान बीजेपी में सबसे बड़ा विवाद टिकट वितरण को लेकर खड़ा हुआ था। वरिष्ठ नेताओं द्वारा अपने चहेते समर्थकों को मनमुताबिक टिकट न दिला पाने के कारण कैडर में गहरा असंतोष था। इस विरोध के चलते आलाकमान को करीब छह महत्वपूर्ण स्थानों पर अपने अधिकृत उम्मीदवार तक बदलने पड़े थे।

- Advertisement -

इस अंदरूनी कलह के कारण बीजेपी को उन शहरी क्षेत्रों में भी करारा झटका लगा, जहां वर्तमान में पार्टी के मजबूत विधायक काबिज हैं। नूरपुर, चौपाल और करसोग जैसे कई प्रमुख विधानसभा क्षेत्रों में बीजेपी समर्थित प्रत्याशियों की करारी हार ने अब शीर्ष संगठन के भीतर कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

दल-बदलू नेताओं को तरजीह मिलने से पुराने कार्यकर्ता नाराज

हमीरपुर जिले के बड़सर में भी यह अंदरूनी राजनीतिक विवाद खुलकर सामने आ गया है। कांग्रेस छोड़कर बीजेपी में आए स्थानीय विधायक इंद्रदत्त लखनपाल को लेकर पार्टी के पुराने धड़े में पहले से भारी असहमति थी। यहां पूर्व विधायक बलदेव शर्मा की नाराजगी भी कई मौकों पर सार्वजनिक तौर पर देखी गई।

ठियोग, कोटखाई और ऊना जिले के कई मंडलों में स्थानीय नेता टिकटों के गणित पर आपस में उलझते दिखाई दिए। दूसरी पार्टियों से आए नए नेताओं को संगठन में ज्यादा तरजीह मिलने से जमीनी कार्यकर्ता बेहद नाराज हैं। इसके अलावा कई नेता अभी से अगले विधानसभा चुनाव की दावेदारी मजबूत करने में जुट गए हैं।

मिशन 2027 के लिए रूठे नेताओं को मनाने की कवायद शुरू

पार्टी के भीतर सक्रिय विरोधी गुटों के भितरघात ने चुनाव परिणामों को सीधे तौर पर प्रभावित किया है। अब प्रदेश बीजेपी नेतृत्व इस बड़ी खींचतान को शांत करने की कोशिश में जुट गया है। पार्टी के शीर्ष रणनीतिकार इस समय सभी मंडलों और जिलों के पदाधिकारियों से जमीनी फीडबैक ले रहे हैं।

आगामी दिनों में संगठन स्तर पर समीक्षा बैठकों का एक लंबा दौर शुरू होने जा रहा है। इन बैठकों में भीतरघात करने वाले असंतुष्टों पर कड़ी अनुशासनात्मक कार्रवाई हो सकती है। पार्टी वर्ष 2027 के आगामी चुनावों के लिए सभी मतभेदों को आपसी बातचीत से सुलझाकर एकजुट होने की योजना बना रही है।

Author: Harikarishan Sharma

- Advertisement -

बड़ी खबरें

Topics

Related Articles