उत्सवों में शान के लिए की जाने वाली हर्ष फायरिंग पड़ रही भारी, पलभर में खुशियां बदल रहीं मातम में

Delhi News: शादी-समारोहों, जन्मदिन पार्टियों और विजय जुलूसों में शान के लिए की जाने वाली हर्ष फायरिंग लगातार एक गंभीर सामाजिक चुनौती बनती जा रही है। गैर-जिम्मेदाराना अंदाज में किए जाने वाले इस हवाई फायर और हथियारों के खुले प्रदर्शन के कारण कई निर्दोष लोगों की जान जा रही है।

कानूनी रूप से सख्त मनाही और बड़ा अपराध होने के बावजूद लोग आज भी इसे अपनी सामाजिक प्रतिष्ठा से जोड़कर देखते हैं। हाल के वर्षों में ऐसी घटनाओं में बेतहाशा बढ़ोतरी देखी गई है। इसके चलते अब समाज के विभिन्न वर्गों से इस पर सख्त पाबंदी लगाने की मांग उठने लगी है।

लापरवाही और कानूनी जानकारी की कमी बनी बड़ी वजह

वरिष्ठ कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि हर्ष फायरिंग की बढ़ती घटनाओं के पीछे सबसे मुख्य कारण कड़ी कानूनी जानकारी का अभाव है। देश के अधिकांश लोगों को यह तक पता नहीं होता कि हथियारों का इस तरह सरेआम प्रदर्शन करना भारतीय कानून के तहत एक गंभीर और दंडनीय अपराध है।

प्रशासन की तरफ से हथियारों का लाइसेंस केवल और केवल आत्मरक्षा के लिए दिया जाता है। लेकिन लोग इसे शक्ति प्रदर्शन और स्टेटस सिंबल मान बैठते हैं। यदि फायरिंग के दौरान किसी की जान जाती है, तो संबंधित व्यक्ति पर हत्या जैसी गंभीर आपराधिक धाराओं में सख्त कार्रवाई होती है।

इसके बावजूद सामाजिक स्तर पर जागरूकता की कमी और कानून के प्रति घोर लापरवाही ऐसी जानलेवा घटनाओं को लगातार बढ़ावा दे रही है। शहर के बुद्धिजीवियों का कहना है कि सोशल मीडिया के इस दौर में दिखावे की गलत संस्कृति ने गन कल्चर को बहुत तेजी से आगे बढ़ाया है।

शहर के विभिन्न वर्गों ने जताई अपनी गंभीर चिंता

ट्रक एसोसिएशन के अध्यक्ष पंकज अनेजा ने इस पर चिंता जताते हुए कहा कि शादी में एक पल की झूठी शान किसी दूसरे परिवार को उम्रभर का गहरा दर्द दे सकती है। वहीं शिक्षाविदों और विशेषज्ञों का मानना है कि इस अनैतिक कृत्य से बच्चे और महिलाएं भयंकर डर के माहौल में जीने को मजबूर हो जाते हैं।

कैफे ओनर पंकज विहान और यूथ अवार्डी दिव्यांश टंडन ने संयुक्त रूप से कहा कि पुलिस और मैरिज होम संचालकों को ऐसी हरकतों पर विशेष निगरानी रखनी चाहिए। यह गैर-जिम्मेदाराना कृत्य मासूम इंसानों के साथ-साथ आकाश में उड़ने वाले बेजुबान पक्षियों की जान के लिए भी बड़ा खतरा बन जाता है।

एंबुलेंस सेवा के जिला प्रभारी जितेंद्र सिसोदिया और विशेषज्ञ राजन चौधरी ने मांग की है कि ऐसे गैर-कानूनी मामलों में प्रशासन को तुरंत असलहा लाइसेंस निरस्त कर देना चाहिए। निर्दोष नागरिकों की सुरक्षा के लिए इस खतरनाक प्रवृत्ति को पूरी तरह खत्म करना बेहद जरूरी है, तभी समाज सुरक्षित रहेगा।

Author: Karuna Sen

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