Delhi News: धार्मिक अनुष्ठानों और बुजुर्गों की पहचान मानी जाने वाली पवित्र तुलसी माला आज देश के युवाओं के बीच एक नया फैशन और लाइफस्टाइल स्टेटस बन चुकी है। आधुनिक पीढ़ी अब अपनी प्राचीन संस्कृति और आध्यात्मिक पहचान को बड़े गर्व से अपना रही है।
कॉलेज जाने वाले छात्रों से लेकर जिम जाने वाले फिटनेस प्रेमियों और सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स तक, सभी इसे दैनिक जीवन का मुख्य हिस्सा बना रहे हैं। इंडियन प्रीमियर लीग यानी आईपीएल क्रिकेट मैचों के दौरान प्रसिद्ध अभिनेत्री अनुष्का शर्मा को भी यह माला पहने देखा गया था।
धार्मिक आस्था के साथ जुड़ा है गहरा मानसिक लाभ
सनातन हिंदू धर्म में तुलसी के पौधे को साक्षात लक्ष्मी का रूप और परम पवित्र माना गया है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार इसे गले में धारण करने से भगवान विष्णु की असीम कृपा मिलती है। इससे मन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है और तनाव से मुक्ति मिलती है।
वैदिक ज्योतिषियों के अनुसार यह पवित्र माला पहनने से व्यक्ति को मानसिक शांति, अटूट सुख-समृ समृद्धि और आत्मिक संतुलन मिलता है। आज की युवा पीढ़ी केवल बाहरी दिखावे के लिए नहीं, बल्कि अपने आत्मविश्वास को बढ़ाने और ईश्वर के प्रति श्रद्धा व्यक्त करने के लिए इसे पहन रही है।
तुलसी माला धारण करने के कड़े नियम और कानून
धार्मिक शास्त्रों के अनुसार तुलसी की माला धारण करने वाले व्यक्ति को पूरी तरह सात्विक जीवनशैली का पालन करना अनिवार्य होता है। इसे पहनने के बाद मांस, मदिरा, तंबाकू या किसी भी प्रकार के नशीले पदार्थों का सेवन करना हिंदू परंपरा में पूरी तरह वर्जित माना गया है।
इसके अतिरिक्त जुआ खेलना, झूठ बोलना, चोरी करना या किसी मासूम व्यक्ति को धोखा देना भी पूर्णतः प्रतिबंधित है। शारीरिक अपवित्रता, सूतक या पातक के समय इस माला को शरीर से तुरंत उतार देना चाहिए। पवित्रता बनाए रखना इस धार्मिक आचरण का सबसे मुख्य नियम है।
जानिए कब और किस विधि से पहनें यह पवित्र माला
ज्योतिष शास्त्र के अनुसार सोमवार, बुधवार और गुरुवार के दिन तुलसी की माला धारण करना सबसे ज्यादा शुभ और फलदायी माना जाता है। इसे पहनने से पहले गंगाजल या गाय के कच्चे दूध से अच्छी तरह शुद्ध करना चाहिए, ताकि इसकी पवित्रता बनी रहे।
शुद्धिकरण के बाद इस माला को भगवान विष्णु के चरणों में अर्पित किया जाता है। इसके पश्चात “ॐ नमो भगवते वासुदेवाय” मंत्र का पूरी श्रद्धा से जाप करते हुए इसे गले में पहना जाता है। यह विधि आचरण में शुद्धता लाती है और बुरे विचारों से बचाती है।
Author: Karuna Sen


