Delhi News: सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को एक आपराधिक मामले की सुनवाई के दौरान बेहद महत्वपूर्ण कानूनी व्यवस्था दी है। देश की शीर्ष अदालत ने साफ कहा कि अगर घर की चारदीवारी के भीतर कोई गंभीर अपराध होता है, तो वहां रहने वाले सदस्यों की यह कानूनी जिम्मेदारी होगी कि वे पीड़ित की मौत का सही कारण बताएं।
जस्टिस प्रशांत कुमार मिश्रा और जस्टिस केवी विश्वनाथन की पीठ ने एक अहम मामले में यह फैसला सुनाया। अदालत ने अपनी पत्नी सोमा आचारजी की क्रूरता से हत्या करने के आरोपी पति गौड़ आचारजी की दोषसिद्धि को बरकरार रखा। शीर्ष अदालत ने दोषी को मिली उम्रकैद की सजा को पूरी तरह सही ठहराया है।
घर में अपराध होने पर परिजनों की बढ़ेगी जवाबदेही
सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई के दौरान स्पष्ट किया कि अभियोजन पक्ष शुरुआती तौर पर मामले को साबित करने का दायित्व निभाता है। इसके बाद घर के लोगों को ही यह बताना होगा कि पीड़ित की मृत्यु किन परिस्थितियों में हुई। दोषी पति अपनी मृत पत्नी के शरीर पर मौजूद गंभीर चोटों का कोई विश्वसनीय स्पष्टीकरण नहीं दे सका।
अदालत ने इस मामले को समाज की आंखें खोलने वाला बताया। पीठ ने कई गंभीर प्रश्न भी उठाए कि क्या समय रहते सोमा आचारजी की जान बचाई जा सकती थी। क्या सामाजिक बदनामी और लोकलाज के डर से एक मासूम महिला को जानबूझकर खतरे में धकेला गया था।
दहेज प्रताड़ना के आरोपी की अपील खारिज, डीजीपी को निर्देश
अदालत के रिकॉर्ड के अनुसार, शादी के कुछ दिनों बाद से ही सोमा को लगातार दहेज के लिए प्रताड़ित किया जा रहा था। इस क्रूर व्यवहार के कारण ही अंततः उसकी जान चली गई। सुप्रीम कोर्ट ने दोषी गौड़ आचारजी की याचिका को सिरे से खारिज कर कानून की सर्वोच्चता को कायम रखा।
सर्वोच्च अदालत ने इस मामले में कड़ा रुख अपनाते हुए त्रिपुरा के पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) को विशेष आदेश दिए हैं। पीठ ने पुलिस को निर्देश दिया कि वह लंबे समय से फरार चल रहे दोषी गौड़ आचारजी का तुरंत पता लगाए। पुलिस उसे जल्द से जल्द हिरासत में लेकर जेल भेजे।
Author: Adv Anuradha Rajput


