कीरतपुर मनाली फोरलेन भूमि अधिग्रहण मामले में जिला अदालत ने नेशनल हाईवे अथॉरिटी को दिया बड़ा झटका, किसानों को मिलेगा पूरा हक और ब्याज

Himachal Pradesh News: कीरतपुर से मनाली फोरलेन प्रोजेक्ट के लिए जमीन देने वाले भू-मालिकों के हक में जिला अदालत ने बड़ा और ऐतिहासिक फैसला सुनाया है। जिला एवं सत्र न्यायाधीश मंडी की अदालत ने भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण यानी नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया की उस याचिका को सिरे से खारिज कर दिया है, जिसमें किसानों के ब्याज को चुनौती दी गई थी।

नेशनल हाईवे अथॉरिटी को जिला अदालत से लगा बड़ा झटका

नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया ने मध्यस्थ यानी आर्बिट्रेटर द्वारा जमीन मालिकों के पक्ष में दिए गए अतिरिक्त ब्याज और वैधानिक लाभों के आदेश के खिलाफ अपील दायर की थी। दरअसल कुल्लू जिला के दउआरा गांव की निवासी राधा देवी की जमीन को फोरलेन हाईवे निर्माण के लिए साल 2016 में सरकार द्वारा अधिग्रहित किया गया था।

सक्षम प्राधिकारी द्वारा तय किए गए मुआवजे की राशि से असंतुष्ट होकर भू-मालिक महिला ने अतिरिक्त मंडलायुक्त यानी आर्बिट्रेटर मंडी की अदालत में न्याय के लिए गुहार लगाई थी। आर्बिट्रेटर ने मामले की समीक्षा करते हुए मूल मुआवजे की रकम को तो नहीं बढ़ाया, लेकिन देरी से भुगतान करने पर सख्त रवैया अपनाया।

देरी से भुगतान करने पर भारी ब्याज देने का आदेश

आर्बिट्रेटर की अदालत ने जमीन मालिक को भूमि अधिग्रहण एवं पुनर्वास अधिनियम के तहत मिलने वाले सभी वैधानिक लाभ प्रदान करने का निर्देश दिया था। इसके साथ ही प्रशासन को निर्देश दिए गए थे कि भू-मालिक को तय समय के बाद हुए देरी से भुगतान पर नौ से पंद्रह प्रतिशत की दर से ब्याज दिया जाए।

नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया ने इस आदेश को कानूनन गलत बताते हुए जिला अदालत में धारा 34 के तहत चुनौती दी थी। प्राधिकरण का मुख्य तर्क यह था कि जब मूल मुआवजे की रकम में कोई बढ़ोतरी नहीं हुई है, तो अलग से ब्याज और अन्य लाभ देना किसानों को दोहरा लाभ देने जैसा है।

अदालत ने कहा किसानों को मुआवजा और ब्याज मिलना अधिकार

मंडी जिला अदालत ने अपने विस्तृत फैसले में सर्वोच्च न्यायालय के विभिन्न कानूनी फैसलों और दृष्टांतों का स्पष्ट हवाला दिया है। अदालत ने साफ किया कि मध्यस्थता अधिनियम की धारा 34 के तहत अदालतें आर्बिट्रेटर के फैसले में तब तक दखल नहीं दे सकतीं, जब तक कोई गंभीर अवैधता न दिखे।

माननीय न्यायाधीश ने अपने फैसले में स्पष्ट रूप से कहा कि किसानों को उनकी जमीन का सही मुआवजा और नियमानुसार उचित ब्याज मिलना उनका कानूनी अधिकार है। अदालत ने नेशनल हाईवे अथॉरिटी की दलीलों को पूरी तरह से खारिज करते हुए किसानों के हक में एक बहुत ही महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है।

Reported By: Sunita Gupta

Join our WhatsApp Channel and Get all Latest News Updates

Hot this week

Related Articles

Popular Categories