Bengaluru News: सरकारी टेलीकॉम कंपनी बीएसएनएल (BSNL) की एक बड़ी लापरवाही के कारण एक को-ऑपरेटिव बैंक को भारी वित्तीय नुकसान झेलना पड़ा है। साइबर ठगों ने कंपनी की ढिलाई का फायदा उठाकर बैंक के खाते से 87 लाख रुपये से ज्यादा की रकम उड़ा दी। इस मामले में कर्नाटक हाईकोर्ट ने बीएसएनएल को तगड़ा झटका दिया है।
कर्नाटक हाईकोर्ट ने इस गंभीर मामले की सुनवाई करते हुए बीएसएनएल को पीड़ित को-ऑपरेटिव बैंक को 55 लाख रुपये से अधिक का मुआवजा देने का ऐतिहासिक आदेश जारी किया है। इसके साथ ही माननीय अदालत ने यह भी स्पष्ट किया है कि इस मुआवजे की राशि पर धोखाधड़ी की तारीख से 9% की वार्षिक दर से ब्याज भी दिया जाएगा।
डुप्लीकेट सिम कार्ड जारी कर ठगों ने उड़ाए लाखों रुपये
यह पूरा मामला ‘श्री बसवेश्वर पट्टाना सहकारी बैंक नियमित’ से जुड़ा हुआ है। इस सहकारी बैंक का केनरा बैंक में एक चालू खाता (करंट अकाउंट) मौजूद था, जो पूरी तरह इंटरनेट बैंकिंग सेवा से जुड़ा हुआ था। खाते से होने वाले तमाम ऑनलाइन वित्तीय लेन-देन के लिए ओटीपी इसी बैंक के रजिस्टर्ड बीएसएनएल मोबाइल नंबर पर आते थे।
साल 2019 के फरवरी महीने में शातिर ठगों ने इस बैंक के खाते में सेंध लगाते हुए सात बार में कुल 87.7 लाख रुपये ट्रांसफर कर लिए। जब मामले की गहन जांच हुई तो एक बेहद चौंकाने वाला खुलासा हुआ। बेंगलुरु के एक बीएसएनएल दफ्तर से किसी अज्ञात व्यक्ति ने बैंक अधिकारियों की जानकारी के बिना ही उसका डुप्लीकेट सिम कार्ड निकलवा लिया था।
जैसे ही ठगों को नया डुप्लीकेट सिम मिला, बैंक का असली सिम कार्ड तुरंत बंद हो गया। इसके बाद साइबर अपराधियों ने नए सिम कार्ड पर बैंकिंग ओटीपी मंगाकर पूरा अकाउंट साफ कर दिया। हालांकि पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए बाद में करीब 37 लाख रुपये बरामद कर लिए थे, लेकिन फिर भी बैंक को 50.5 लाख रुपये का शुद्ध नुकसान हुआ था।
अदालत ने कहा: ग्राहकों की सुरक्षा टेलीकॉम कंपनी की जिम्मेदारी
सहकारी बैंक ने इस धोखाधड़ी के बाद बीएसएनएल और केनरा बैंक को कानूनी नोटिस भेजा था। इसके बाद मामले को स्थायी लोक अदालत में ले जाया गया, जिसने शुरुआत में बीएसएनएल की लापरवाही मानते हुए केवल 5 लाख रुपये का मुआवजा तय किया था। इस फैसले के खिलाफ बैंक ने कर्नाटक हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था।
कर्नाटक हाईकोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि जब किसी बैंक का मोबाइल नंबर ओटीपी आधारित लेन-देन से जुड़ा हो, तो टेलीकॉम कंपनी की जवाबदेही कहीं ज्यादा बढ़ जाती है। अदालत ने माना कि किसी मूल ग्राहक की पहचान की पुष्टि किए बिना या उसकी अनुमति के बिना डुप्लीकेट सिम जारी करना सेवा में एक गंभीर और अक्षम्य लापरवाही है।
Author: Suresh Gowda


