Prayagraj News: इलाहाबाद हाई कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में साफ किया है कि दो बालिग व्यक्तियों को अपनी मर्जी से वैवाहिक जीवन जीने का पूरा अधिकार है। अदालत ने कहा कि किसी भी तीसरे व्यक्ति को उनके निजी जीवन में हस्तक्षेप करने की बिल्कुल भी इजाजत नहीं दी जा सकती।
अदालत ने स्पष्ट किया कि यदि किसी विवाहित दंपती को किसी भी प्रकार की धमकी, हिंसा या मानसिक उत्पीड़न का सामना करना पड़ता है, तो वे तुरंत स्थानीय पुलिस आयुक्त, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (एसएसपी) या पुलिस अधीक्षक (एसपी) से सीधे सुरक्षा की गुहार लगा सकते हैं।
मामले की गंभीरता को देखते हुए संबंधित जिले की पुलिस तुरंत पूरे मामले की गहन जांच करेगी और पीड़ित दंपती को आवश्यक सुरक्षा मुहैया कराएगी। यह बड़ा आदेश न्यायमूर्ति कुनाल रवि सिंह की एकलपीठ ने बदायूं निवासी चांदनी और गुड्डू की याचिका पर सुनवाई करते हुए दिया।
पीड़ित दंपती ने अदालत से अपने परिजनों या अन्य लोगों द्वारा वैवाहिक जीवन में किए जा रहे हस्तक्षेप को रोकने की मांग की थी। उन्होंने कोर्ट को बताया कि उन्होंने 15 मई 2026 को बदायूं के पिपरौल स्थित आर्य समाज मंदिर में पूरे रीति-रिवाज से विवाह किया है।
दो महीने के भीतर विवाह पंजीकरण कराना बेहद अनिवार्य
सुनवाई के दौरान हाई कोर्ट ने कहा कि बालिग व्यक्तियों को अपनी पसंद से जीवनसाथी चुनने का संवैधानिक अधिकार प्राप्त है। हालांकि, अदालत ने याचिका का निस्तारण करते हुए एक बेहद महत्वपूर्ण शर्त भी रखी है, जिसका पालन करना दंपती के लिए अनिवार्य होगा।
कोर्ट ने निर्देश दिया कि दंपती ‘उत्तर प्रदेश विवाह पंजीकरण नियमावली-2017’ के तहत दो महीने के भीतर अपने विवाह का कानूनी पंजीकरण जरूर कराएं। यदि निर्धारित अवधि में विवाह का रजिस्ट्रेशन नहीं कराया गया, तो अदालत द्वारा दी गई सुरक्षा अपने आप खत्म हो जाएगी।
उम्र के दस्तावेजों को लेकर अदालत ने दी बड़ी व्यवस्था
अदालत ने यह भी साफ किया कि उसने विवाह की वैधता, मैरिज सर्टिफिकेट की सत्यता या याचिकाकर्ताओं की वास्तविक आयु के संबंध में कोई अंतिम निर्णय नहीं दिया है। यह आदेश कानून के तहत भविष्य में होने वाली किसी भी अन्य विभागीय जांच या कार्रवाई में बाधा नहीं बनेगा।
मामले में चांदनी ने सरकारी पहचान पत्र के आधार पर अपनी जन्मतिथि 11 अप्रैल 2007 बताई है, जबकि गुड्डू ने अपने पैन कार्ड और अन्य दस्तावेजों के अनुसार जन्मतिथि 1 जनवरी 2004 दर्शाई है। दोनों ने अदालत को केवल पांचवीं कक्षा तक ही शिक्षा प्राप्त करने की जानकारी दी है।
Author: Adv Anuradha Rajput


