Ayodhya News: अयोध्या स्थित भव्य श्री राम जन्मभूमि मंदिर में श्रद्धालुओं द्वारा अर्पित किए जाने वाले दान और चढ़ावे के प्रबंधन को लेकर एक बड़ा विवाद सामने आया है। मंदिर के धन के प्रबंधन में कथित अनियमितताओं और हेराफेरी के गंभीर आरोपों के बाद अब सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया गया है।
सुप्रीम कोर्ट को एक विशेष पत्र याचिका भेजी गई है, जिसमें मंदिर के दान को लेकर उठे सभी गंभीर और संवेदनशील सवालों की निष्पक्ष जांच कराने की मांग प्रमुखता से की गई है। इस याचिका के सामने आने के बाद से ही धार्मिक और कानूनी हलकों में हड़कंप मच गया है।
वरिष्ठ वकील अनूप प्रकाश अवस्थी द्वारा भेजी गई इस पत्र याचिका में देश की सर्वोच्च अदालत से विशेष अनुरोध किया गया है। याचिका में मंदिर में प्राप्त होने वाले दान और चढ़ावे के प्रबंधन में हुई कथित वित्तीय गड़बड़ियों की जांच के लिए तुरंत एफआईआर दर्ज करने का निर्देश देने की मांग की गई है।
इसके साथ ही मामले की गहराई से जांच के लिए केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) जैसी देश की शीर्ष और सक्षम एजेंसी को नियुक्त करने का आग्रह किया गया है। याचिकाकर्ता ने साफ किया है कि यह पूरी जांच प्रक्रिया सुप्रीम कोर्ट की सीधी निगरानी में ही संचालित होनी चाहिए।
करोड़ों राम भक्तों की आस्था और पैसे की पारदर्शिता का मामला
भेजे गए आधिकारिक पत्र में कहा गया है कि श्री राम जन्मभूमि मंदिर वर्तमान में पूरे विश्व के सबसे महत्वपूर्ण और संवेदनशील धार्मिक स्थलों में से एक है। यहाँ भारत सहित पूरे देश-विदेश से आने वाले लाखों श्रद्धालु पूरी श्रद्धा के साथ हर महीने बड़ी मात्रा में कीमती दान और चढ़ावा अर्पित करते हैं।
ऐसी स्थिति में मंदिर के धन के संग्रह, उसके सटीक लेखा-जोखा (ऑडिट), संरक्षण और दैनिक खर्चों में पूर्ण पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित की जानी बेहद अनिवार्य है। किसी भी तरह की कोताही से देश की छवि और जनता की अटूट धार्मिक आस्था को गहरा आघात लग सकता है।
ज्ञात आय से अधिक संपत्ति होने का भी लगा गंभीर आरोप
पत्र याचिका में एक और बेहद सनसनीखेज आरोप लगाया गया है। इसके अनुसार मंदिर के दान प्रबंधन और देखरेख से जुड़े कुछ खास व्यक्तियों के पास उनकी ज्ञात कानूनी आय के स्रोतों से कहीं अधिक अनुपातहीन संपत्ति होने की खबरें और शिकायतें लगातार सामने आई हैं।
हालांकि, याचिका में यह भी स्पष्ट किया गया है कि इन सभी वित्तीय आरोपों की वास्तविक सत्यता की पुष्टि केवल एक सक्षम, स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच एजेंसी के माध्यम से ही संभव हो सकती है। बिना जांच के किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचना जल्दबाजी होगी।
याचिकाकर्ता वकील ने चिंता जताते हुए कहा है कि इन वित्तीय अनियमितताओं के आरोपों ने देश और दुनिया भर में फैले करोड़ों सनातनियों और राम भक्तों के बीच एक बड़ी चिंता पैदा कर दी है। जनता की आस्था से जुड़े ऐसे मामलों में निष्पक्ष और व्यापक जांच बहुत जरूरी है ताकि श्रद्धालुओं का अटूट विश्वास बना रहे।
Author: Adv Anuradha Rajput


