New Delhi News: दुनिया भर में कच्चे तेल की कीमतें आसमान छू रही हैं। पश्चिम एशिया में भीषण युद्ध चल रहा है। इस भारी संकट के बीच मोदी सरकार ने पेट्रोल और डीजल पर उत्पाद शुल्क (एक्साइज ड्यूटी) घटाने का बड़ा फैसला लिया है। सरकार ने पेट्रोल-डीजल पर 10 रुपये प्रति लीटर की बड़ी टैक्स कटौती की है। इस फैसले के बाद हर तरफ एक ही सवाल उठ रहा है कि आखिर सरकार ने यह कदम क्यों उठाया? केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने अब खुद इस बड़े फैसले के पीछे की पूरी सच्चाई देश को बताई है।
सरकार के सामने थे सिर्फ दो विकल्प
केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने बताया कि कच्चे तेल का अंतरराष्ट्रीय भाव 70 डॉलर से बढ़कर 122 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया है। ऐसे में सरकार के पास सिर्फ दो ही रास्ते बचे थे। पहला रास्ता यह था कि अन्य देशों की तरह भारत में भी पेट्रोल-डीजल के दाम सीधे बढ़ा दिए जाएं। दूसरा रास्ता यह था कि सरकार खुद इस भारी वित्तीय नुकसान को उठाए। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आम जनता पर कोई नया बोझ न डालते हुए दूसरे विकल्प को चुना है।
दुनिया भर में बेतहाशा बढ़े ईंधन के दाम
पश्चिम एशिया के इस युद्ध का असर पूरी दुनिया पर पड़ा है। अमेरिका और यूरोप में ईंधन की कीमतें 20 से 30 प्रतिशत तक बढ़ गई हैं। दक्षिण एशिया और अफ्रीकी देशों में तो दाम 50 प्रतिशत तक उछल चुके हैं। भारत में हालात बेकाबू न हों, इसके लिए सरकार ने टैक्स में यह भारी कटौती की है। पेट्रोल पर लगने वाले उत्पाद शुल्क को 13 रुपये से घटाकर सीधा 3 रुपये कर दिया गया है। वहीं डीजल पर लगने वाले 10 रुपये के शुल्क को पूरी तरह से शून्य कर दिया गया है।
तेल कंपनियों को हो रहा था भारी घाटा
अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चा तेल महंगा होने के बावजूद भारत में ईंधन के दाम स्थिर थे। इसका सीधा नुकसान हमारी सरकारी तेल कंपनियों को उठाना पड़ रहा था। इंडियन ऑयल और भारत पेट्रोलियम जैसी कंपनियों को पेट्रोल पर 24 रुपये और डीजल पर 30 रुपये प्रति लीटर का घाटा हो रहा था। इस टैक्स कटौती से इन कंपनियों को बहुत बड़ी राहत मिलेगी। उनका घाटा कम होगा और देश भर में तेल की सप्लाई बिना किसी रुकावट के लगातार जारी रहेगी।


