मीनाक्षी नटराजन का नामांकन रद्द होने पर भड़की कांग्रेस, मध्य प्रदेश में अब छिड़ेगा बड़ा सियासी संग्राम

Madhya Pradesh News: कांग्रेस की वरिष्ठ नेता मीनाक्षी नटराजन का नामांकन निरस्त होने का मामला गरमा गया है। अब यह महज एक चुनावी विवाद नहीं रहा। यह मध्य प्रदेश की राजनीति में एक बहुत बड़ा सियासी टकराव बन चुका है। मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस ने इस प्रशासनिक फैसले को पूरी तरह लोकतांत्रिक प्रक्रिया के खिलाफ बताया है।

पार्टी ने इस कार्रवाई के विरोध में तीखी सियासी जंग छेड़ने का एलान किया है। कांग्रेस अब कानूनी लड़ाई और सड़क पर प्रदर्शन दोनों मोर्चों पर एक साथ उतरेगी। पार्टी ने अपनी रणनीति पूरी तरह साफ कर दी है। भोपाल के सियासी गलियारों से लेकर देश की राजधानी दिल्ली तक इस बड़े मुद्दे की गूंज सुनाई दे रही है।

तीन दिनों तक सड़कों पर उतरेगी कांग्रेस और करेगी बड़ा आंदोलन

कांग्रेस आलाकमान ने स्पष्ट संकेत दिए हैं कि वह इस गंभीर प्रकरण को सिर्फ राजनीतिक बयानबाजी तक सीमित नहीं रखेगी। पार्टी इस कानूनी मुद्दे को एक बड़े जनआंदोलन का रूप देने जा रही है। कांग्रेस की ओर से आगामी 15 से 17 जून 2026 तक तीन दिवसीय प्रदेशव्यापी व्यापक विरोध कार्यक्रम तय किया गया है।

इस बड़े आंदोलन को सफल बनाने के लिए पार्टी ने अपने अलग-अलग संगठनात्मक विंग्स को बड़ी जिम्मेदारी सौंपी है। तय कार्यक्रम के अनुसार 15 जून को युवा कांग्रेस के कार्यकर्ता सड़कों पर उतरकर उग्र विरोध प्रदर्शन करेंगे। इसके अगले दिन यानी 16 जून को एनएसयूआई छात्र संगठन शैक्षणिक परिसरों और मुख्य चौराहों पर अपनी नाराजगी दर्ज कराएगा।

इसके अंतिम दिन यानी 17 जून को महिला कांग्रेस मोर्चा संभालते हुए इस एकतरफा कार्रवाई के खिलाफ व्यापक प्रदर्शन करेगी। प्रदेश कांग्रेस कमेटी का दावा है कि यह पूरा आंदोलन पूरी तरह शांतिपूर्ण लेकिन बेहद प्रभावी होगा। इधर राजनीतिक हलचल के बीच पीड़ित नेता मीनाक्षी नटराजन पिछले कई दिनों से दिल्ली में डेरा डाले हुए हैं।

दिल्ली में डेरा और हाईकोर्ट में चुनाव याचिका दायर करने की तैयारी

वह नई दिल्ली में पार्टी के शीर्ष नेतृत्व और नामचीन कानूनी विशेषज्ञों के साथ लगातार रणनीतिक चर्चा कर रही हैं। सूत्रों के अनुसार कांग्रेस इस प्रशासनिक अन्याय के खिलाफ बहुत जल्द माननीय हाईकोर्ट का रुख करने वाली है। पार्टी की तरफ से उच्च न्यायालय में एक ‘चुनाव याचिका’ दायर की जा सकती है।

वरिष्ठ कानूनी जानकारों का कहना है कि इस मामले में अदालती प्रक्रिया काफी जटिल हो सकती है। नियम के मुताबिक संबंधित लोकसभा या विधानसभा सीट से विजयी हुए सभी उम्मीदवारों को भी इस केस में पक्षकार बनाना आवश्यक होगा। इससे यह पूरा कानूनी मामला और अधिक लंबी बहस तथा पेचीदगियों में उलझ सकता है।

फिलहाल इस अप्रत्याशित घटनाक्रम ने मध्य प्रदेश की जमीनी राजनीति में एक नई हलचल पैदा कर दी है। राजनीतिक पंडितों का मानना है कि आने वाले दिनों में यह चुनावी विवाद और ज्यादा तेज होगा। इस फैसले का असर प्रदेश के आगामी चुनावों और पार्टी के आंतरिक समीकरणों पर भी सीधे तौर पर पड़ सकता है।

Author: Vijay Chouhan

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