हिमाचल में अब इन गाड़ियों को नहीं देना होगा कोई टोल टैक्स! विधानसभा में सुक्खू सरकार का बड़ा ऐलान

Himachal News: हिमाचल प्रदेश के वाहन चालकों के लिए एक बहुत बड़ी और राहत भरी खबर है। मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने विधानसभा में एक अहम घोषणा की है। राज्य की टैक्सियों और हल्के मोटर वाहनों (LMV) पर अब कोई टोल टैक्स नहीं लगाया जाएगा। इसके अलावा, सीमावर्ती इलाकों के लोगों को टोल से छूट देने और पास जारी करने पर भी सरकार गंभीरता से विचार कर रही है। सरकार ने साफ किया है कि आम जनता की सहूलियत के लिए टोल व्यवस्था में कई बड़े बदलाव किए गए हैं।

रोजाना सफर करने वालों को मिलेगा पास

विधानसभा के प्रश्नकाल में विधायक राकेश जम्वाल, सुखराम चौधरी और राकेश कालिया ने टोल का मुद्दा उठाया। इसके जवाब में मुख्यमंत्री सुक्खू ने स्थिति स्पष्ट की। सीमावर्ती इलाकों के जो लोग रोज काम के सिलसिले में राज्य की सीमा पार करते हैं, उन्हें राहत मिलेगी। सरकार ऐसे लोगों के लिए पास जारी करने पर सहानुभूति से विचार करेगी। इसके अलावा, जो बाहरी लोग नियमित रूप से हिमाचल आते-जाते हैं, वे अपनी गाड़ी हिमाचल में पंजीकृत कराकर इस छूट का फायदा उठा सकते हैं।

फास्टैग से जुड़े टोल, एक साथ जुड़ेंगे बैरियर

सरकार ने लोगों के सफर को आसान बनाने के लिए एक और बड़ा कदम उठाया है। जहां भी राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) और राज्य सरकार के टोल बैरियर अगल-बगल हैं, उन्हें आपस में जोड़ा जाएगा। इससे वाहन चालकों का समय बचेगा। मुख्यमंत्री ने सदन को बताया कि राज्य के सभी टोल बैरियर अब फास्टैग सिस्टम से जोड़ दिए गए हैं। उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि टोल टैक्स में उतनी बढ़ोतरी नहीं हुई है, जितनी अफवाहें उड़ाई जा रही हैं।

5 किलोमीटर के दायरे में रहने वालों को खास छूट

टोल नीति के तहत तय की गई तिमाही और सालाना दरें केवल स्थानीय लोगों पर ही लागू होंगी। यह सुविधा उन वाहन मालिकों को मिलेगी जो किसी भी टोल बैरियर के 5 किलोमीटर के दायरे में रहते हैं। इस विशेष छूट का लाभ उठाने के लिए एक शर्त रखी गई है। वाहन मालिक को संबंधित एसडीएम या तहसीलदार से अपना निवास प्रमाण पत्र लाकर देना होगा। यह प्रमाण पत्र साबित करेगा कि उनका घर टोल बैरियर के 5 किलोमीटर के भीतर मौजूद है।

सरकारी खजाने में आएंगे 228 करोड़ रुपये

राज्य में प्रवेश शुल्क बढ़ाने से सरकारी खजाने को बड़ा फायदा पहुंचने वाला है। सरकार को पिछले साल के मुकाबले इस बार लगभग 54 करोड़ रुपये अधिक राजस्व मिलने की उम्मीद है। इससे कुल प्रवेश शुल्क राजस्व बढ़कर करीब 228 करोड़ रुपये हो जाएगा। मुख्यमंत्री सुक्खू ने जनता को भरोसा दिलाया है कि इस फैसले से महंगाई बिल्कुल नहीं बढ़ेगी। आम उपभोक्ताओं पर भी कोई अतिरिक्त आर्थिक बोझ नहीं पड़ेगा। हालांकि, पर्यटन पर इसका क्या असर होगा, इसका आकलन अभी किया जाना बाकी है।

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